बिलासपुर। यज्ञवेदी के उच्च आचार्य पद पर पुस्र्षों के वर्चस्व को तोड़कर अब महिलाएं भी आगे आ रही हैं। गायत्री परिवार की पहल से अब वे इस पद पर विराजित होकर संस्कृत में धारा प्रवाह मंत्रोच्चार के साथ हवन-पूजन करा रही हैं। हिन्दू धर्म में जन्म से लेकर मृत्यु तक के सभी 16 कर्मकांड करवाते हुए पुरोहित धर्म का निर्वाह भी कर रही हैं।

महिलाओं ने गायत्री परिवार से मिले प्रोत्साहन से इस नई परंपरा की शुरुआत की हैं। वे बड़ी ही कुशलता और सहजता के साथ यज्ञ व कर्मकांड करवा रही हैं। गायत्री परिवार की ओर से उन्हें 21वीं सदी नारी सदी के पावन संदेश के साथ आचार्य पद देकर पुरोहिती का अधिकार दिया गया है। इससे अब तक परंपरागत सामाजिक कर्म से दूर हीं महिलाएं भी सहभागी बन रही हैं।


वहीं उनके मुख से निकले धाराप्रवाह संस्कृत में मंत्रोच्चार सभी को आश्यर्च में डाल देते हैं। वहीं वे महिलाओं के लिए प्रेरणा का काम भी कर रही हैं।


मिलती है ट्रेनिंग


हरिद्वार में मासिक युग कीर्ति कार्यक्रम के तहत एक महीने तक सभी को 16 संस्कार (तोड़क संस्कार) के साथ ही हवन-पूजन व यज्ञ विधि की ट्रेनिंग दी जाती है। मंत्रोच्चार की कला भी सिखाई जाती है।


इससे वे सभी संस्कारों व यज्ञ, हवन की पूजन विधि में दक्ष हो जाती हैं। इसके बाद भी समय-समय पर उनके पुरोहिती कार्य में निखार लाने ट्रेनिंग होती रहती है।


ये हैं कर्मकांड


हिन्दू धर्म में जन्म संस्कार, यज्ञोपवीत संस्कार, विवाह संस्कार समेत सभी 16 कर्मकांडी संस्कार शामिल हैं। साथ ही दीप यज्ञ व अन्य मांगलिक व विशेष अवसरों में होने वाले यज्ञ व हवन कुशलता से करवा रही हैं।


30 महिलाएं हैं दक्ष


शहर में जामबाई लाल, तारा सोनी, मालती मिश्रा, अनिता साहू, अहिल्या मिश्रा समेत करीब 30 महिलाएं इस कार्य में दक्ष हैं। उनमें से कुछ महिलाएं पिछले 15 साल से ये कार्य कर रही हैं। वे शहर ही नहीं, आसपास के क्षेत्र में जाकर यज्ञ, हवन व परिवारों में होने वाले मांगलिक कार्य संपन्न् करा रही हैं।


आता है आमंत्रण


गायत्री परिवार के परिब्राजक द्वारिका प्रसाद पटेल ने बताया कि महिलाओं के हाथों अपने घर में होने वाले पूजन कार्य करवाने के लिए आमंत्रण भी आता है।