बिलासपुर। सरकारी खजाने में दो किलोग्राम सोना व पांच किलोग्राम चांदी के जेवर को अफसरों ने इस आस में सुरक्षित रखा है कि कभी न कभी जेवर के दावेदार आएंगे। उनकी पहचान पुख्ता करने के बाद जेवरों को उनके हवाले कर दिया जाएगा।


बीते 19 वर्षों से अफसर दावेदारों का इंतजार ही कर रहे हैं। अब तक इसे लेने कोई नहीं आया है । यही कारण है कि कलेक्टोरेट परिसर स्थित जिला कोषालय के स्ट्रांग रूम में इसे सुरक्षित रखा गया है। वर्ष 1998-99 में शहर के एक मोहल्ले में रहने वाले बुजुर्ग दंपति की मौत हो गई थी। उनके घर में मोहल्लेवासियों ने परिचितों के अलावा किसी अन्य लोगों को भी आते-जाते नहीं देखा था।


संयोग ये कि दोनों बुजुर्ग दंपति की एक साथ मौत हो गई थी। घर में किसी अन्य के न होने के कारण मोहल्लेवासियों ने सबसे पहले पुलिस को सूचना दी। मोहल्लेवासियों की मौजूदगी में पुलिस ने घर के सामानों की खोजबीन की थी।


इस दौरान पेटी में सोने व चांदी के कीमती जेवर देखकर पुलिस के साथ ही मोहल्लेवासी भी आश्चर्य में पड़ गए थे। परिजन व अन्य किसी परिचत के न आने के कारण मोहल्लेवालों ने ही बुजुर्ग दंपति का अंतिम संस्कार किया था।


सोने व चांदी के जेवर के साथ ही अन्य सामग्री की जानकारी स्थानीय पुलिस के अफसरों ने बिलासपुर के तत्कालीन एसडीएम को दी। एसडीएम की देखरेख में सोने व चांदी के जेवरों को अलग-अलग कर तौल कराया गया।


तौल के दौरान दो किलोग्राम सोने व पांच किलोग्राम चांदी के जेवर निकला। इसे अलग-अलग पैकेट में रखकर तत्कालीन एसडीएम व थाना प्रभारी तथा अन्य लोगों की मौजूदगी में सीलबंद किया गया। सीलबंद करने के बाद एसडीएम ने इसकी जानकारी कलेक्टर को दी थी। वारिस या दावेदार न आने की स्थिति में कलेक्टर के निर्देश पर इसे कलेक्टोरेट परिसर स्थित जिला कोषालय के स्ट्रांग रूम में सुरक्षित रखा गया है। तब से लेकर आजतक जेवर कोषालय में सुरक्षित रखे हुए हैं।


पेटी में क्या-क्या जेवर किसी को नहीं है पता


सीलबंद पेटी में सोने व चांदी के जेवर के अलावा क्या-क्या है यह किसी को पता नहीं है। तत्कालीन एसडीएम ने कलेक्टर के निर्देश पर सोने व चांदी के जेवर व बिस्किट की अलग-अलग सूची बनाकर बाक्स में रख दिया है।


तत्कालीन एसडीएम ने तब के जिला कोषालय अधिकारी को लिखित में दस्तावेज सौंपा है। इसे फाइल में नस्तीबद्ध कर बाक्स के ऊपर सुरक्षित रखा गया है। फाइल पर दीमक का हमला न हो इसे ध्यान में रखते हुए स्ट्रांम रूम में समय-समय पर दीमकरोधी ट्रीटमेंट भी किया जाता है। स्ट्रांग रूम में चौबीस घंटे एक चार के गार्ड की तैनाती रहती है।


- वर्ष 1998-99 में शहर के एक वार्ड में बुजुर्ग दंपति की मौत के बाद उनके वारिस न मिलने पर तत्कालीन एसडीएम ने कलेक्टर के निर्देश पर सीलबंद पेटी में सोने व चांदी के जेवर जिला कोषालय में रखाया गया है। - आरबी वर्मा, तत्कालीन जिला कोषालय अधिकारी


- जिला कोषालय में सीलबंद सोने व चांदी के जेवर को सुरक्षित रखा गया है। - एके शुक्ला, उप संचालक जिला कोषालय, बिलासपुर