नई दिल्ली भारत के राष्ट्रपति द्वारा दिल्ली की आम आदमी पार्टी सरकार के 20 विधायकों को अयोग्य ठहराए जाने के बाद उनकी पार्टी के पूर्व एक विधायक का कहना है कि वह अरविंद केजरीवाल के लिए जान देने को भी तैयार हैं. इन विधायकों को लाभ का पद रखने के मामले में चुनाव आयोग के बाद राष्ट्रपति ने भी अयोग्य ठहरा दिया है.


अयोग्य ठहराए गए पार्टी विधायक अनिल वाजपेयी ने कहा है कि वह पार्टी और अपने नेता के लिए जान देने के लिए तैयार हैं. उन्होंने कहा, 'प्रधानमंत्री पहले दिन से हमारी सरकार को अस्थिर करने की कोशिश कर रहे थे. चुनाव आयोग ने हमारे साथ अन्याय किया है. झारखंड, हरियाणा और तेलंगाना में भी संसदीय सचिव हैं, उनका क्या हुआ? हम हमेशा से अरविंद जी के साथ हैं, हमारी पार्टी संघर्ष से बनी है. विधायकी क्या चीज है, हम केजरीवाल के लिए जान देने को भी तैयार हैं.'


20 विधायकों में शामिल अयोग्य ठहराई गईं आप नेता अलका लांबा ने कहा है, 'यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि राष्ट्रपति ने इतनी जल्दबाजी में फैसला लिया. हमें बोलने का मौका तक नहीं दिया. यह केंद्र सरकार का संवैधानिक संस्थाओं के दुरुपयोग का मामला है. हमें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है, हमारे लिए हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे खुले हैं.'

आम आदमी पार्टी सरकार में मंत्री गोपाल राय ने कहा है. 'यह दुर्भाग्यपूर्ण है, लोकतंत्र के साथ मजाक है. यह संविधान और प्राकृतिक न्याय के खिलाफ है. हमें राष्ट्रपति से उम्मीद थी कि हमें अपना पक्ष रखने का मौका दिया जाएगा. अब हमें यह खबर मिली है. अगर जरूरत पड़ी तो हम हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक जाएंगे.' उन्होंने कहा है कि चुनाव आयोग ने बिना सुनवाई के फैसला दिया है. हमारे विधायकों ने हर नोटिस का जवाब दिया है और अब इस मामले में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में अपील की जाएगी.गोपाल राय ने फिर से चुनाव में जाने की तैयारी पर कहा कि अभी उन्हें न्यायालय की प्रतिक्रिया का इंतजार है. उन्होंने कहा है कि बीजेपी के हर अन्याय के खिलाफ लड़ने के लिए आम आदमी पार्टी हमेशा तैयार है.

आपको बता दें कि रविवार दोपहर के राजनीतिक घटनाक्रम में राष्ट्रपति ने भी आम आदमी पार्टी के 20 विधायकों को अयोग्य ठहरा दिया था. इससे पहले चुनाव आयोग ने पार्टी के 20 विधायकों को अयोग्य ठहराने की अनुशंसा की थी.


चुनाव आयोग ने लाभ का पद लेने के मामले में दिल्ली की सत्ताधारी आम आदमी पार्टी (आप) के 20 विधायकों को अयोग्य ठहरा दिया था. इसके बाद 'आप' ने चुनाव आयोग की सिफारिश के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया था. हालांकि, हाई कोर्ट से भी आप के विधायकों को राहत नहीं मिली थी. हाई कोर्ट ने निर्वाचन आयोग की सिफारिश के खिलाफ पार्टी को अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया था.