नई दिल्ली  राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने आम आदमी पार्टी के 20 विधायकों की सदस्यता रद्द करने की सिफारिश को मंजूरी दे दी. इस फैसले के फौरन बाद ही कांग्रेस आप पर हमलावर हो गई है. कांग्रेस के दिल्ली प्रभारी अजय माकन ने कहा कि दिल्ली सरकार ने नियमों को दरकिनार करते हुए 7 की जगह 21 मंत्री बना दिए.


माकन ने कहा कि संविधान के मुताबिक सिर्फ सात मंत्री हो सकते हैं. 21 विधायकों को मंत्री के बराबर सुविधाएं मुहैया कराईं. ये भ्रष्टाचार का उदाहरण है.


कांग्रेस ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग ने आम आदमी पार्टी के 20 विधायकों को अयोग्य घोषित किए जाने का सुझाव देने में देरी कर आप की ‘‘मदद’’ की है. इन 20 विधायकों पर लाभ का पद संभालने का आरोप है.


दिल्ली कांग्रेस के प्रमुख अजय माकन ने यह बताने की भी कोशिश की इस देरी में बीजेपी का भी हाथ है लेकिन इस बारे में कोई सबूत नहीं दिया.


माकन ने कहा, ‘‘बीजेपी के निर्देशों पर चुनाव आयोग ने अपनी अनुशंसा में एक महीने की देरी की और आम आदमी पार्टी की मदद की. राज्य सभा चुनाव से पहले यह अनुशंसा आई होती तो आप अंदरूनी दरार के चलते टूट चुकी होती.’’


चुनाव आयोग ने आप के 20 विधायकों को लाभ का पद धारण करने के कारण अयोग्य घोषित करने की अनुशंसा की गई है जिसके बाद आज लगातार दूसरे दिन माकन ने आप पर हमला बोला.


माकन ने कल नैतिक आधारों पर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के इस्तीफे की मांग की थी.


बता दें कि आप की दिल्ली सरकार ने मार्च 2015 में 21 विधायकों को संसदीय सचिव के पद पर नियुक्त किया जिसको लेकर प्रशांत पटेल नाम के वकील ने लाभ का पद बताकर राष्ट्रपति के पास शिकायत करते हुए इन विधायकों की सदस्यता खत्म करने की मांग की थी.


हालांकि विधायक जनरैल सिंह के पिछले साल विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा देने के बाद इस मामले में फंसे विधायकों की संख्या 20 हो गई थी.