दो हज़ार देवदूत (अनाथ) बच्चों को पढ़ा रहा है वि.जा.मिशन

विराट भक्ति सत्संग महोत्सव का दूसरा दिन

पुणे, 20 जनवरी । विश्व जागृति मिशन नयी दिल्ली तथा पुणे मण्डल के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित विराट भक्ति सत्संग महोत्सव के दूसरे दिन सन्तश्री सुधांशु जी महाराज ने ‘’गुरुसत्ता की महत्ता एवं उसकी आवश्यकता’’ विषय पर प्रेरक उदबोधन दिया। उन्होंने ‘कृष्णं वन्दे जगदगुरुम्’ की चर्चा करते हुये गीतानायक श्रीकृष्ण को संसार का गुरु बताया और उनके एकमात्र शिष्य अर्जुन के आश्वासन ‘करिष्ये वचनं तव’ का बड़ा मार्मिक विवेचन किया।कहा कि ‘करिश्ये वचनं तव’ कहकर अपने वचन का पालन करने पर महावीर अर्जुन खण्डित भारत को एक सुदृढ़ भारत ‘महाभारत’ बनाने में सफल हुये थे। उन्होंने समर्थ गुरु रामदास व शिवाजी, ठाकुर राम कृष्ण परमहंस व विवेकानन्द, रामानन्द व कबीर, कुलगुरु डॉ. रामकृष्णन एवं उनके विद्यार्थियों आदि गुरुओं एवं शिष्यों का गरिमामयी भारतीय इतिहास उपस्थित जनसमुदाय को याद दिलाया। उन्होंने वेद, गुरु, गीता एवं रामचरितमानस आदि को मानने के साथ-साथ उनकी शिक्षाओं को भी मानने तथा उन्हें जीवन में उतारने का आहवान सभी से किया। उन्होंने गुरु-शिष्य के सम्बन्ध को बेहद संवेदनशील व वेशक़ीमती कहा।
 
विश्व जागृति मिशन के निदेशक श्री राम महेश मिश्र ने बताया कि मिशन द्वारा लगभग दो हज़ार देवदूत (अनाथ) बच्चों को शिक्षा प्रदान की जा रही है। उन्होंने विविध आध्यात्मिक गतिविधियों के साथ ही मिशन की शिक्षा, स्वास्थ्य, गौसेवा, वृद्धजन सेवा, साहित्य सेवा तथा परिवार निर्माण गतिविधियों की जानकारी शिक्षानगरी पुणे सहित पश्चिमी महाराष्ट्र के विभिन्न जनपदों से आए हज़ारों सत्संग प्रेमियों को दी।
 
आज की सन्ध्या कृष्णनगरी मथुरा (उत्तर प्रदेश) से पधारे भक्ति भजन-सम्राट विनोद अग्रवाल द्वारा प्रस्तुत रसदायी भजनों को समर्पित रही। सुधांशु जी महाराज के सत्संग कार्यक्रम के उपरान्त उन्होंने प्रेरणादायी भजन उपस्थित जनसमुदाय को सुनाए।
 
विजामि के पुणे मण्डल के महामन्त्री श्री जय किशन जिन्दल ने बताया कि रविवार-21 जनवरी को मध्याहनकाल सामूहिक मन्त्र दीक्षा का कार्यक्रम सम्पन्न होगा। मण्डल प्रधान श्री घनश्याम झँवर ने बताया कि सत्संग महोत्सव का समापन रविवार को सायंकाल होगा।