नई दिल्लीः नेशनल हेराल्ड के बहुचर्चित मामले में शनिवार को फिर तब नया मोड आया जब भाजपा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने ट्रायल कोर्ट को आयकर विभाग के कुछ दस्तावेज सौंपकर दावा किया कि इनसे घोटाले की बात साबित हो जाती है। ये दस्तावेज आयकर विभाग की उस आदेश की प्रतिलिपि बताए जा रहे हैं जिसमें कथित तौर पर नेशनल हेराल्ड मामले में की गई धोखाधड़ी का उल्लेख किया गया है। स्वामी की मानें तो आयकर विभाग ने सोनिया-राहुल के स्वामित्व वाली यंग इंडियन कंपनी को करीब चौर सौ करोड़ रुपये चुकाने के आदेश दिए हैं। ज्ञात हो कि कल ही स्वामी ने इस आशय का ट्वीट किया था कि वह सुबह जब अखबार उठाने बाहर निकले तो उन्हें एक गुमनाम लिफाफा मिला।इसी लिफाफे में आयकर विभाग के आदेश की कापी थी। उन्होंने शनिवार को यह कापी ही अदालत को सौंपी। अदालत ने इन दस्तावेजों के सीलबंद लिफाफे में रखने के आदेश देकर 17 मार्च को सुनवाई करने को कहा है।

अदालत में स्वामी ने दावा किया कि इन दस्तावेजों से साबित हो जाता है कि नेशनल हेराल्ड की दो हजार करोड़ की संपत्ति पर कब्जा करने के लिए साजिश रची गई थी। उनके अनुसार कांग्रेसी नेताओं ने यंग इंडियन कंपनी के जरिये नेशनल हेराल्ड की मालिकाना कंपनी एसोसिएट्स जर्नल्स लिमिटेड को 90 करोड़ रुपये देने का जो दावा किया था वह गलत है। ध्यान रहे कि कांग्रेसी नेताओं सोनिया, राहुल मोतीलाल वोरी आदि ने 26 फरवरी 2011 को एसोसिएट्स जर्नल्स लिमिटेड की 90 करोड़ रुपये की देनदारियों को अपने जिम्मे ले लिया था। यंग इंडियन कंपनी महज 5 लाख रुपये से बनाई गई थी। इसमें सोनिया और राहुल की 38-38 फीसदी हिस्सेदारी है। शेष 24 फीसदी हिस्सेदारी कांग्रेस नेता मोतीलाल वोरा और ऑस्कर फर्नांडीज के पास है।

स्वामी की ओर से इस मामले को उठाने के बाद से कांग्रेस सीधे तौर पर चाहे जो कुछ रहे, संसद के भीतर-बाहर उसके नेताओं के रवैये से उसकी परेशानी सामने आती रही है। यह स्वामी की पहल का ही परिणाम रहा कि कांग्रेस को नेशनल हेराल्ड को फिर से शुरू करने का उपक्रम करना पड़ा। स्वामी का दावा है कि नेशनल हेराल्ड की संपत्तियों से कांग्रेसी नेता लाखों रुपये महीने का किराया हासिल कर रहे हैं।