कलाकार : केके मेनन,राइमा सेन,मंदिरा बेदी,शारिब हाशमी
निर्देशक : कुशल श्रीवास्तव
मूवी टाइप : Thriller

अवधि : 1 घंटा 58 मिनट

 

पुलिसवालों पर एक से एक मुश्किल केस सुलझाने की जिम्मेदारी होती है लेकिन कई बार केस इतने मुश्किल होते हैं कि वे खुद भी उनमें उलझ जाते हैं। फिल्म 'वोदका डायरीज' भी एक ऐसे ही पुलिस वाले की कहानी है जो एक केस को सुलझाते-सुलझाते खुद उसमें बुरी तरह उलझ जाता है।

मनाली के वोदका डायरीज क्लब में एक ही रात में एक के बाद एक कई खून होते हैं, जिन्हें सुलझाने की जिम्मेदारी एसीपी अश्विनी दीक्षित (के.के. मेनन) पर आती है। अभी छुट्टी से लौटा अश्विनी इस केस तब और बुरी तरह उलझ जाता है जब इस केस की वजह से उसकी पत्नी शिखा ( मंदिरा बेदी) भी गायब हो जाती हैं। अश्विनी की पत्नी कविता लिखती हैं। कई बार अश्विनी को अपनी पत्नी पर हमला होने के भी सपने आते थे लेकिन उसके गायब होने से वह काफी परेशान हो जाते हैं।

इसी बीच अश्विनी एक रहस्यमय लड़की रोशनी बनर्जी ( राइमा सेन) से मिलते हैं जिस पर उसे शक होता है लेकिन इसी बीच चीजें और भी ज्यादा उलझ जाती हैं और अश्विनी एक ऐसे जाल में फंस जाते हैं जिससे निकलना आसान नहीं है। उनके सब अपने पराये हो जाते हैं। बेशक, फिल्म एक ऐसे मोड़ पर खत्म होती है, जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती।

के.के. मेनन हमेशा की तरह की शानदार लगे हैं। उन्होंने बेहतरीन काम किया है। खासकर एसीपी के रोल में वह जंचे हैं। हालांकि मंदिरा बेदी जरूर कई सीन्स में ओवर ऐक्टिंग करती नजर आती हैं। वहीं राइमा सेन ने जरूर रोल की डिमांड के मुताबिक ऐक्टिंग की है। फिल्म की कहानी आपको शुरू से आखिर तक बांधे रखती है। इंटरवल से पहले तक कहानी दिलचस्प है और उसके बाद आपकी जिज्ञासा और बढ़ जाती है। ऐड फिल्म मेकिंग से फिल्म निर्देशन में आए इस फिल्म के निर्देशक कुशल श्रीवास्तव ने अच्छी कोशिश की है। अगर आपको थ्रिलर फिल्में पसंद हैं, तो आप निराश नहीं होंगे। साथ ही मनाली की खूबसूरत लोकेशन आपको पसंद आएंगी।