प्रतिभालय आर्टस अकादमी द्वरा आयोजित ’’बालोत्सवम्’’ में नन्हें कलाकारों द्वारा भरतनाट्यम समूह नृत्य प्रस्तुति देखने को मिली। कार्यक्रम में अकादमी की बाल ईकाई के 20 कलाकारों ने मनमोहक प्रस्तुतियां दी जिनमें से उल्लेखनीय है अलारिप्पु, पुष्पांजलि सीता कल्याण, हनुमान चालीसा। इसके साथ ही कलाकारेां ने आदि गुरू शंकराचार्य के जीवन और रचनाओं पर आधारित नृत्य नाटिका भी नृत्य गुरू सुश्री मंजू म.िा हतवलने के मार्गदर्शन ,वं निर्देशन में करी। अकादमी के सचिव श्री विशाल हतवलने के अनुसार संस्था भारतीय शास्=ीय कलाओं के प्रचार प्रसार हेतु और नई पीढ़ी को देश की संस्कृति और सभ्यता से जोड़े रखने के लि, समय≤ पर ,ेसे कार्यक्रमों का आयोजन कराती रहती है। (कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पùश्री मेहरूनिसा परवेज रहीं।
प्रतिभालय आर्टस ,.ड अकादमी भोपाल के कार्यक्रम में 05 प्रकार के भरत् नाट्यम की प्रस्तुतियां बाल कलाकारों ने दी।
1-    अलारिपुः-
भरतनाट्यम में शारिरीक प्रक्रिया केा तीन भागों में बांटा जाता हैः- समभंग, अभंग, =भिंग भरत नाट्यम में नृत्य क्रम में यह सबसे पहले किया जाता है। आलारिपु- इस अंश में बोल (सोल्लू कुट्टु) रहती है। इसी की छंद में आवृत्ति होती है तिश्र या मिश्र छंद तथा करताल और मृदंग के साथ यह अंश अनुष्ठित होता है, इदसे इस नृत्यानुष्ठान की भूमिका कहा जाता है।
2-    पुष्पांजलि
पुष्पांजलि का अर्थ हेाता है पुष्प समर्पित करना, इसके द्वारा भारतनाट्यम नृत्य प्रस्तुति का आरंभ किया जाता है, इस नृत्य के में ईश्वर की आराधना से नृत्य प्रस्तुति की के लि, ईश्वर से प्रार्थना की जाती है।
3-    सीता कल्याणम्
राजा जनक द्वारा यह घोषणा भी की गई कि स्वयंवर में मौजूद जो भी पुरूष शिवाजी के धनुष उठाकर उस पर प्रत्यंचा चढ़ाने में सफल हुआ होगा, वही उनकी पुत्री से विवाह करने लायक हेागा।
देख विदेश के कई राजकुमार स्वयंवर में आ, जिनमें से ,क रावण भी था जो धनुष उठाने के बावजूद प्रत्यंचा चढ़ाने में सफल नहीं हो सका। और फिर बाद में श्रीराम इस धनुष केा उठाकर उस पर प्रत्यंचा चढ़ाने में सफल होंगे। जिसके बाद राजा जनक श्रीराम-सीता का विवाह करवाते हैं।
4-    हनुमान चालीसा
हनुमान चालीसा तुलसीदास की अवधि में लिखी ,क काव्यात्मक कृति है जिसमें प्रभु राम के महान भक्त हनुमान के गुणों, व कार्यों का चालीस चैपाइयों में र्वणन है। यह अत्यंत लघु रचना है जिसमें पवन पुत्र श्री हनुमान जी की सुन्दर स्तुति की गई है। इसमें बजरंग बालीकी भावर्पूण वंदना तो है ही श्रीराम का व्यक्तित्व भी सरल शब्दों में उकेरा गया है।
वैसे तो पूरे भारत में यह लोकप्रिय है किनतु विशेष रूप से उत्तर भारत में यह बहुत प्रसि) ,वं लोकप्रिय है। लगभग सभी हिन्दुओं को यह कंठस्थ होती है कहा जाता है कि इसके पाठ से भय दूर हेाता है, क्लेष मिटते हैं इसके गंभीर भावों पर विचार करने से मन में श्रेष्ठ ज्ञान क साथ भक्तिभाव जागृत होता है।
5-    आदि शंकराचार्य
इन्होंने भारतवर्ष में चार मठों की स्थापना की थी जो अभी तक बहुत प्रसि) और पवि= माने जाते हैं और जिनके प्रबंधक तथा गद्दी के अधिकारी शंकराचार्य कहे जाते हैं। वे चारों स्थान ये हैः- 1- बदरिकाश्रम 2- करवीर पीठ 3- द्वारिका पीठ और 4- शारदा पीठ इन्होंने अनेक विधर्मियों को भी अपने धर्म में दीक्षित किया था। ये शंकर के अवतार माने जाते हैं इन्होंने ब्रह्मसूत्रों की बड़ी ही विशद और रोचक व्याख्या की है। उनकी कुछ रचनाएं है जैसे गणेश पंचरत्न स्त्रोत, शिव षड़ा{ार स्त्रोत, महिषासुर मर्दिनी स्त्रोत आदि को इस नृत्य नाटिका में शामिल किया गया है।