पंजाब और हरियाणा में मकर संक्रांति के एक दिन पहले हंसी-खुशी और उल्लास का त्यौहार ‘लोहड़ी’ मनाया जाता है। इस दिन शाम के समय लोग आग जलाकर उसके चारों तरफ नाचते हैं व तिल-गुड़ गच्चक, रेवडिय़ां, मूंगफली और मक्की के भुने दाने आपस में मिल बैठकर खाते हैं। परिवार में आने वाले नवजन्मे शिशु चाहे वह बेटा हो या बेटी, उसकी खुशी में पहली लोहड़ी धूमधाम से मनाई जाती है। उससे अगले दिन मकर संक्रांति को कई प्रकार के धार्मिक आयोजन होते हैं। पूरा आकाश रंग-बिरंगी पतंगों से भर जाता है व पतंगबाजी के मुकाबले देखने योग्य होते हैं।



असम में यह दिन ‘माघ बिहू’ के रूप में फसल की कटाई का उत्सव  माना जाता है। बिहू से एक दिन पूर्व ‘उरूका पर्व’ आयोजित किया जाता है जिसमें रात को ‘भेला घर’ यानी अलाव जलाकर भोज का आयोजन किया जाता है।



दक्षिण भारत में दूध व चावल की खीर तैयार कर ‘पोंगल’ मनाया जाता है। आंध्र प्रदेश में इस अवसर पर तीन दिन तक मंगल उत्सव मनाने की परंपरा है। प्रथम दिन ‘भोगी मंगल’ नामक पारिवारिक उत्सव मनाया जाता है। सूर्यदेव के नाम उत्सर्गित इस दिन चावल, दूध व गुड़ से लोग मंगल तैयार करते हैं। तीसरे दिन ‘मट्ट मंगल’ दिवस पर गायों, भैंसों व बैलों की पूजा की जाती है। उनके सींगों को साफ करके फिर रंगीन बनाया जाता है व गले में फूलों की माला डाल कर उनके प्रति कृतज्ञ भाव व्यक्त किया जाता है। गुजरात व सौराष्ट्र में ‘उत्तरायण’ के नाम से जाने जाने वाले इस दिन पर महिलाओं द्वारा हल्दी-कुमकुम लगाने का रिवाज है।



महाराष्ट्र में इस दिन लोग एक-दूसरे को तिल-गुड़ भेंट में देते हुए कहते हैं, ‘गुड़ तिल लीजिए और मीठा-मीठा बोलिए।’



उत्तर भारत में यह पर्व ‘खिचड़ी पर्व’ के रूप में प्रसिद्ध है। इस दिन लोग सामूहिक रूप से पवित्र नदियों में स्नान कर सूर्यदेव को अर्घ्य देते हैं।