इलाहाबाद : सिर पर गठरी, हाथ में झोला और मन में श्रद्धा का भाव लिए नर, नारी व बच्चों का रेला। चहुंओर हर-हर गंगे का उद्घोष। शनिवार की दोपहर बाद माघ मेला क्षेत्र में दृश्य कुछ ऐसा ही था। स्नान पर्व मकर संक्रांति पर गंगा-यमुना व अदृश्य सरस्वती की पावन त्रिवेणी में डुबकी लगाने के लिए भीड़ आती रही। वैसे इस बार मकर संक्रांति स्नान दो दिन होगा। जो इसे 14 जनवरी को ही मानते हैं, वह रविवार को डुबकी लगाकर पुण्य की कामना के साथ दान करेंगे। उदया तिथि मानने वाले 15 जनवरी को मकर संक्रांति का स्नान करेंगे। इसलिए दो दिनों तक भीड़ बनी रहेगी।


सरकारी कैलेंडर के अनुसार 14 जनवरी रविवार को मकर संक्रांति है, जबकि ग्रह-नक्षत्रों की चाल से स्नान-दान का उपयुक्त मुहूर्त 15 जनवरी मिलेगा। इसलिए अधिकतर संत-महात्मा सोमवार को ही मकर संक्रांति का स्नान करेंगे। आचार्य देवेंद्र प्रसाद त्रिपाठी के अनुसार रविवार की रात 8.04 बजे मकर संक्रांति लग जाएगी, जो सोमवार को 12.04 बजे तक रहेगी। मकर राशि में सूर्य का प्रवेश रविवार रात होगा। सोमवार को तुला में मंगल व गुरु, मकर राशि में सूर्य व शुक्र एवं धनु राशि में शनि व बुध का संचरण होगा। साथ ही मूल नक्षत्र, धु्रव योग, वाणिज करण का दुर्लभ संयोग बनेगा। यहीं से सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायण हो जाएंगे। देवताओं का दिन व असुरों की रात्रि शुरू होगी। इस परिवर्तन से रुके शुभ व मांगलिक कार्य आरंभ हो जाएंगे। मान्यता है कि मकर संक्रांति पर तीर्थराज प्रयाग की त्रिवेणी में डुबकी लगाकर दान करने से श्रद्धालुओं को मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है, इसलिए स्नान के लालायित सनातन मतावलंबियों की भीड़ आनी शुरू हो गई है।


दान करने से मिलेगी संपन्नता


ज्योतिर्विद आचार्य अविनाश राय बताते हैं कि मकर संक्रांति को संगम में स्नान के साथ दान का काफी महत्व है। काले तिल व चावल का दान कल्याणकारी माना जाता है। काला तिल का महादान सबसे श्रेष्ठ होता है, चावल देवताओं का प्रिय अन्न है। इसके दान से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है।


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इसका करें दान


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*-काला तिल


*-चावल


*-ऊनी वस्त्र


*-धार्मिक पुस्तक


*-सोना व चांदी


*-मौसमी फल