नई दिल्ली देश में पहली बार न्यायपालिका में शुक्रवार को असाधारण स्थिति देखी गई. सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा जजों ने मीडिया को संबोधित किया. चीफ जस्टिस के बाद दूसरे सबसे सीनियर जज जस्टिस चेलमेश्वर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि सुप्रीम कोर्ट का प्रशासन ठीक तरीके से काम नहीं कर रहा है, अगर ऐसा चलता रहा तो लोकतांत्रिक परिस्थिति ठीक नहीं रहेगी.


उन्होंने कहा कि हमने इस मुद्दे पर चीफ जस्टिस से बात की, लेकिन उन्होंने हमारी बात नहीं सुनी. इस संबंध में जस्टिस चेलमेश्वर, जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस मदन लोकुर और जस्टिस कुरियन जोसेफ ने चीफ जस्ट‍िस दीपक मिश्रा को लिखे एक लेटर को भी सार्वजनिक किया था. लेटर में वकील आरपी लूथरा के केस विवाद की प्रमुख वजह के रूप में मौजूद है.


यही वजह है कि इंडिया टुडे ने इस संबंध में वकील आरपी लूथरा से बातचीत की. लूथरा ने इंडिया टुडे से खास बातचीत में हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में जजों की नियुक्ति‍वाले केस का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि‍ इस केस में उन्होंने एलपीए दायर की थी. उन्होंने कहा कि कोर्ट का कोलेजियम सिस्टम सही नहीं है, इसके बावजूद उससे नियुक्त‍ियां हो रही हैं.


लूथरा के अनुसार यही वजह है कि उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में पि‍टीशन दाखिल किया था. उन्होंने कहा था कि यह आर्टिकल 16,14,19 और 21 का उल्लंघन है. जब उनके लिखित तर्क को नहीं सुना गया, तब उन्होंने रिव्यू पि‍टीशन दाखिल किया. उसके बाद सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी डाली. 23 अक्टूबर को जस्ट‍िस यूयू ललित ने जजों की नियुक्ति संबंधी उनकी याचिका को निरस्त कर दिया.


आपको बता दें कि MOP के बिना हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में जजों की नियुक्ति को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी. हाईकोर्ट के याचिका खारिज करने के बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल की थी. नवंबर में चीफ जस्टि‍स दीपक मिश्रा की बेंच ने हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में जजों की नियुक्ति को लेकर मेमोरेंडम ऑफ प्रोसीजर (MOP) में हो रही देरी पर दाखिल लूथरा की इस याचिका को आखिरकार खारिज कर दिया था.


मेमोरेंडम ऑफ प्रोसीजर (MOP) का मामला नहीं था


लूथरा के अनुसार 2016 में उनके द्वारा दाखिल याचिका चार जजों के सिफ़ारिश पर सवाल उठाते हुए थी. हालांकि कोर्ट ने इसे मेमोरेंडम ऑफ प्रोसीजर का मामला बनाते हुए सुना. लूथरा के अनुसार सुप्रीम कोर्ट में उन्होंने तर्क दिया था कि यह जजों की सिफ़ारिश मामला है, लेकिन उनकी याचिका को बिना सही तरीके से सुने हुए खारिज कर दिया गया. लूथरा ने अंत में कहा कि मेरी लड़ाई सिस्टम के खिलाफ है, न कि किसी व्यक्ति‍ के खिलाफ.