रायपुर। भू राजस्व संहिता संशोधन विधेयक पर विपक्ष का दबाव झेल रही सरकार भाजपा के आदिवासी नेताओं का मुखर विरोध के बाद झुक गई। इस विधेयक पर सरकार की किरकिरी के बाद अब मंत्रालय में उस अफसर की तलाश हो रही है जिसने इस कानून की सलाह दी थी।


मंत्रालय में कैबिनेट की बैठक से ठीक पहले अजजा आयोग के अध्यक्ष जीआर राणा और संसदीय सचिव सिद्धनाथ पैकरा के साथ भाजपा के प्रदेश भर के आदिवासी नेता पहुंचे। मंत्री महेश गागड़ा भी आदिवासी नेताओं के साथ सीएम से मिलने पहुंचे। मुख्यमंत्री ने आदिवासी नेताओं से चर्चा की जिससे यह साफ हो गया कि विधेयक वापस लेने के अलावा सरकार के पास कोई और विकल्प नहीं है। नेताओं ने सपष्ट बता दिया कि अगर यह कानून लागू हुआ तो चुनाव में वे आदिवासी क्षेत्रों में वोट मांगने नहीं जा पाएंगे।


एक तरफ राजस्व मंत्री आदिवासी मंत्रियों को लेकर विधेयक पर सफाई देते रहे वहीं दूसरी ओर पार्टी के ही आदिवासी नेता इस मुद्दे पर सरकार से नाराज हो गए। आखिरकार विधेयक वापस लेने की नौबत आ गई। मंत्रालय देर शाम इसी बात की चर्चा रही कि ऐसे कानून की जरूरत क्या थी जिसे वापस लेना पड़ गया। राजस्व विभाग के अफसरों में खलबली मची है।


बताया गया है कि राज्य में पहले ही सरकारी परियोजनाओं के लिए आदिवासियों की जमीन अधिग्रहण करने के पर्याप्त कानून हैं। भू राजस्व संहिता की धारा 165 (छ) के तहत केंद्र और राज्य सरकार के उपक्रमों के लिए जमीन ली जा सकती है। पूरे प्रदेश में इसी कानून के तहत विकास कार्यांे के लिए सरकार आदिवासियों की भूमि का अधिग्रहण कर रही है और कहीं कोई दिक्कत भी नहीं है। अब कहा जा रहा कि ऐसे में इस कानून को लाने की क्या जरूरत थी।


श्रेय लेने की होड़


इस विधेयक की वापसी के बाद अब भाजपा और कांग्रेस में श्रेय लेने की होड़ मच गई है। मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि सरकार पहले ही विधेयक वापस लेने का मन बना चुकी थी। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष धरम लाल कौशिक ने कहा कि लोकतंत्र में सरकार को निर्णय और उन निर्णयों पर आने वाली प्रतिक्रिया को ध्यान में रखकर काम करना चाहिए और भाजपा सरकार ने जनभावना के अनुसार काम कर संवेदनशीलता का परिचय दिया। भाजपा अजजा मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और राज्य सभा सांसद रामविचार नेताम ने कहा कि इस फैसले से छत्तीसगढ़ में भाजपा और मजबूत होगी। इससे आदिवासी समाज में अच्छा संदेश जाएगा।


रमन सरकार आदिवासी हितैषी सरकार है यह साफ हो गया है। अजजा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष सिद्धनाथ पैकरा ने कहा कि इस निर्णय से लोकतंत्र मजबूत हुआ है। इधर कांग्रेस ने राजस्व मंत्री प्रेम प्रकाश पांडेय के उस बयान पर आपत्ति जताई है जिसमें उन्होंने कहा कि दवा कड़वी हो तो बदलनी चाहिए। कांग्रेस ने कहा है कि क्या भाजपा आदिवासियों को मरीज समझती है। कांग्रेस प्रवक्ता आरपी सिंह ने कहा है कि इस बयान के लिए मंत्री को माफी मांगनी चाहिए। कांगे्रस नेताओं का कहना है कि उनके दबाव के कारण ही सरकार बिल वापस लेने पर मजबूर हुई है।


मंत्रिपरिषद के अन्य फैसले


किसानों के बिजली बिल पर सेटलमेंट का निर्णय


कृषक जीवन ज्योति योजना के तहत किसानों को फ्लैट रेट पर बिल भुगतान की सुविधा दी जाएगी। इस योजना में 3 एचपी एवं 5 एचपी तक के सिंचाई पम्प कनेक्शनों पर प्रतिवर्ष क्रमश: 6000 और 7500 यूनिट तक बिजली नि:शुल्क देने का प्रावधान है। इससे अधिक बिजली खपत पर चार्ज देना होता है। फ्लैट रेट का विकल्प चुनने पर 1 अप्रैल 2013 अथवा बिजली बिल की बकाया राशि की तारीख से उनके बिलों को 100 रूपए प्रतिमाह प्रति एचपी के मान से संशोधित कर सरचार्ज सहित भुगतान की मांग की जाएगी। इस निर्णय से प्रदेश के 82 हजार किसान लाभान्वित होंगे। उन पर 21 करोड़ रूपए का बिजली बिल बकाया है।


भारत नेट परियोजना पर हुई चर्चा


मंत्रिपरिषद में भारत नेट परियोजना की जानकारी दी गई। इस परियोजना में प्रदेश के सभी ग्राम पंचायतों को इंटरनेट कनेक्विटी दी जाएगी। परियोजना के तहत प्रथम चरण में 2131 ग्राम पंचायतों में कार्य पूर्ण कर लिया गया है। द्वितीय चरण में 5987 ग्राम पंचायतों को नेशनल आप्टिकल फाईवर नेटवर्क से जोड़ने का लक्ष्य है। इसके लिए 1624 करोड़ 74 लाख रूपए की प्रशासकीय स्वीकृति मिल गई है।


मीसा बंदियों के आवेदन की तिथि बढ़ी


लोक नायक जयप्रकाश नारायण (मीसा/डीआईआर राजनैतिक या सामाजिक कारणों से निरूद्ध व्यक्ति) सम्मान निधि नियम 2008 में आवेदन प्रस्तुत करने के लिए अंतिम तारीख 31 मार्च 2017 थी, जिसे संशोधित कर 31 दिसम्बर 2018 करने का निर्णय लिया गया।