जबलपुर। मध्यप्रदेश हाई कोर्ट ने इंदौर जिला कोर्ट भवन पिपल्याहाना तालाब के समीप 15.75 एकड़ भूमि पर बनाए जाने का रास्ता साफ कर दिया। मुख्य न्यायाधीश हेमंत गुप्ता व जस्टिस विजय कुमार शुक्ला की युगलपीठ ने पूर्व में बहस पूरी होने के बाद सुरक्षित किया गया आदेश गुरुवार को सुनाया, जिसमें साफ किया गया कि राज्य शासन 6 माह के भीतर बजट आदि स्वीकृत करने की प्रक्रिया पूरी कर निर्माण शुरू कराए।


इंदौर अभिभाषक संघ एक माह में अधिवक्ता चेंबर के संबंध में अपनी आवश्यकता के बारे में सरकार को सूचित कर दे। ऐसा न किए जाने की सूरत में वकीलों से स्वतंत्र रूप से सीधे आवेदन आमंत्रित कर चेंबर की व्यवस्था की जाएगी।


उल्लेखनीय है कि इंदौर अभिभाषक संघ ने 2016 में अपनी याचिका के जरिए पिपल्याहाना तालाब के संरक्षण का हवाला देते हुए इंदौर जिला अदालत की नई इमारत वर्तमान स्थल पर ही निर्मित किए जाने पर बल दिया था। संघ का कहना था कि मौजूदा जिला कोर्ट भवन के समीप मिल के लिए भूमि आवंटित की गई है। यदि वह आवंटन निरस्त कर भूमि उपयोग परिवर्तित करते हुए अधिग्रहित जमीन का जिला अदालत भवन के लिए उपयोग हो तो अपेक्षाकृत बेहतर होगा।


इससे वकीलों को नई जगह की मौजूदा जगह से दूरी संबंधी समस्या से निजात मिलेगी। संघ ने वर्तमान इमारत के समीप की कुछ और शासकीय भूमि भी अधिग्रहित किए जाने पर बल दिया था। यही नहीं संघ का कहना था कि यदि पुरानी जगह की मांग अस्वीकार की जाती है तो फिर नई जगह पर लेबर कोर्ट, सेल्स टैक्स कमिश्नर और रेवेन्यू कमिश्नर के भवन भी बनाए जाने की व्यवस्था दी जाए।


हाई कोर्ट ने इंदौर अभिभाषक संघ की सभी मांगें नामंजूर करते हुए याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने साफ किया कि इंदौर जिला अदालत नई प्रस्तावित जगह पर ही बनेगी। ऐसा इसलिए क्योंकि वर्ष 2000 में आवंटित हुई भूमि में इजाफे के लिए समीप की आईडीए की भूमि भी अधिग्रहित की जा चुकी है। ऐसे में पर्याप्त भूमि उपलब्ध हो गई है, जिसमें जिला अदालत का अपेक्षाकृत बेहतर भवन बन सकेगा।


लंबे समय से चल रहा था विरोध


इंदौर जिला अदालत की नई इमारत के स्थल का विरोध लंबे समय से चल रहा था। जो याचिका खारिज की गई, उसके अलावा सामाजिक कार्यकर्ता किशोर कोडवानी और कांग्रेस विधायक जीतू पटवारी आंदोलित हुए थे। कृषि कॉलेज की जमीन पर भी जिला कोर्ट भवन बनाए जाने की बात उठाई गई थी, जिससे कृषि कॉलेज से जुड़े संगठनों ने विरोध शुरू कर दिया था।