जिस दुधमुंही बच्ची को परिवार वाले मृत मान उसका अंतिम संस्कार करने के लिए श्मशान घाट पहुंच गए थे, उसे दफनाने के पहले कफन का कपड़ा हटाया तो वो आंखे खोलकर मुस्कुरा रही थी.


कुदरत के करिश्मे का यह मामला मध्य प्रदेश के ग्वालियर का है. यहां भाऊ के बाजार में रहने वाली स्वाति द्विवेदी की कुछ साल पहले लखनऊ में शादी हुई थी. डिलेवरी के लिए वह करीब तीन महीने पहले ग्वालियर आई थी. 13 नवंबर को स्वाति ने एक बेटी को जन्म दिया. बाद में अस्पताल से डिस्चार्ज होने पर वह अपने मायके में ही रह रही थी.


कुछ दिनों बाद स्वाति की नवजात बेटी की तबीयत अचानक बिगड़ गई, जिसे इलाज के लिए कमलाराजा बाल चिकित्सालय में भर्ती कराया गया था. मंगलवार को हालत में सुधार होने पर बच्ची को डाक्टरों ने डिस्चार्ज कर दिया था. बुधवार को अचानक उसकी हालत बिगड़ी और वह बेसुध हो गई.


परिजनों ने समझा कि बच्ची की मौत हो गई. चार घंटे तक परिवार बच्ची के शव को रखकर बिलखता रहा और उसके अंतिम संस्कार के लिये मुक्तिधाम ले गए. जहां दफनाने के लिए गड्ढा खोदकर उसमें लिटाने के लिए कफन का कपड़ा हटाया तो बच्ची ने आंखे खोल दी.



परिजनों ने तत्काल उसे कमलाराजा बाल चिकित्सालय में भर्ती कराया. जहां उसे वेंटिलेटर पर रखा गया है. हालांकि, उसकी हालत स्थिर बताई जा रही है.