इंदौर। डीपीएस हादसे के बाद जिला प्रशासन ने स्कूली बच्चों को लाने-ले जाने वाले ऑटो रिक्शा और वैन पर प्रतिबंध लगा दिया है। स्कूल संचालकों और प्राचार्यों की बैठक में भी कलेक्टर ने कहा कि जितनी जल्दी हो स्कूली बसें मानकों के अनुसार व्यवस्थित करवा लें। नियमों का उल्लंघन होने पर जब्त वाहन तब तक नहीं छूट पाएगा, जब तक वह कबाड़ न हो जाए।


मंगलवार को आदेश जारी करते हुए कलेक्टर निशांत वरवड़े ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने स्कूली वाहनों के मामले में ढाई साल पहले गाइड लाइन तय की थी। इसके उल्लंघन पर सजा का प्रावधान किया था। इन नियमों पालन होता, तो डीपीएस बस हादसा नहीं होता। उन्होंने कहा कि हादसा बस के साथ हुआ है लेकिन वैन और ऑटो रिक्शा पर प्रतिबंध लगाने के लिए अगली दुर्घटना का इंतजार नहीं करेंगे। हर हाल में नियमों का सख्ती से पालन करना होगा। कलेक्टर ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की गाडइ लाइन में रियायत देने का अधिकार कलेक्टर को भी नहीं है। नियम पालन करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है।


कबाड़ में बेच दो अपने वाहन


प्रतिबंध के बाद मंगलवार दोपहर बड़ी संख्या में वैन और ऑटो रिक्शा चालक कलेक्टोरेट पहुंचे। उनकी मांग थी कि प्रतिबंध लगने से वे बेरोजगार हो जाएंगे। कलेक्टर ने कहा कि सभी को नियमों का पालन करना होगा। यदि आपके वाहन पुराने हैं तो उन्हें 80 रुपए किलो में कबाड़ में बेच दो और नए वाहन के लिए आवेदन कर दो। लोन लेने के लिए प्रशासन मदद करेगा लेकिन अब कोई समझौता नहीं होगा।


बच्चों की सुरक्षा जरूरी


प्रतिबंध से शहर के 30 फीसदी स्कूली विद्यार्थियों को आने-जाने में परेशानी तो होगी लेकिन अभिभावकों को यह समझना होगा कि डीपीएस जैसी दूसरी त्रासदी भविष्य में न हो, इसके लिए एक पुख्ता सिस्टम बनाना बेहद जरूरी है। शुरुआती दौर में अभिभावक सहयोग करें क्योंकि जितनी जिम्मेदारी परिजन की अपने बच्चों को स्कूल भेजने की है, उससे कहीं ज्यादा उनकी सुरक्षा की है। 


-निशांत वरवड़े, कलेक्टर