रायपुर। सरकार और सर्वआदिवासी समाज के बीच मंगलवार को वार्ता विफल रही। चूंकि बैठक में कोई मंत्री मौजूद न था, लिहाजा आदिवासी नेताओं ने इसका बहिष्कार कर दिया और दो टूक कहा- कि जो लोग निर्णय नहीं ले सकते, उनसे बातचीत का कोई औचित्य नहीं।


यह नीतिगत निर्णय है। बात करने के लिए मुख्यमंत्री और कैबिनेट के वह मंत्री सामने आएं, जिन्होंने इसे विधानसभा में पारित किया है। आदिवासी नेताओं ने सरकार को विधेयक वापस न लेने पर गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी। साथ ही 10 फरवरी को राजधानी में शक्ति प्रदर्शन का भी ऐलान किया।


आपसी सहमति से आदिवासियों की जमीन लेने के लिए राजस्व संहिता में किए गए संशोधन का सर्व आदिवासी समाज विरोध कर रहा है। आदिवासियों के विरोध को देखते हुए मंगलवार को सरकार ने उन्हें बातचीत के लिए राजधानी स्थित सर्किट हाउस में आमंत्रित किया था।


बैठक के लिए 4:30 बजे का समय तय था। सर्व आदिवासी समाज के अध्यक्ष बीपीएस नेताम के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल सर्किट हाउस पहुंचा, लेकिन उन्हें जैसे ही पता चला कि चर्चा के लिए केवल सचिव मौजूद हैं।


उन्होंने विरोध करते हुए इसका बहिष्कार कर दिया। प्रतिनिधिमंडल में सोहन पोटाई, बीएस रावटे, नवल सिंह, विनोद नागवंशी, आनंद टोप्पो और एसआर प्रधान समेत अन्य शामिल थे। आदिवासी नेताओं ने कहा कि इस संशोधन विधेयक की वापसी के अलावा कुछ भी स्वीकार नहीं है।


पोटाई ने कहा कि प्रदेश में 80 लाख आदिवासी हैं। ऐसा लग रहा है सरकार को हमारी जरूरत नहीं है, सीएम को जिस दिन जरूरत महसूस होगी, हमें बुला लेंगे। उन्होंने कहा कि यह कानून किसी के हित में नहीं है।