सेंसर बोर्ड से पद्मावती फिल्म का नाम बदलकर पद्मावत के नाम किए जाने के बाद भी राजस्थान सरकार अपने रुख पर कायम है. अब पद्मावत को राजस्थान में रिलीज नहीं किया जाएगा. वहीं, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान अब तक फिल्म पर कोई अंतिम फैसला नहीं ले सके हैं.


शिवराज सिंह चौहान फिल्म के रिलीज पर रोक लगाने से संबंधित कोई भी फैसला लेने के पहले राजपूत समाज के प्रतिनिधिमंडल से एक बार फिर मुलाकात करेंगे. एक अंग्रेजी दैनिक के अनुसार, इस मुलाकात के बाद ही तय होगा कि 25 जनवरी को संजय लीला भंसाली की 'पद्मावत' मध्य प्रदेश में रिलीज होगी या नहीं.


मुख्यमंत्री चौहान ने 20 नवंबर को राजपूत समाज के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात के बाद पद्मावती फिल्म के रिलीज पर रोक लगाने का ऐलान किया था. मुख्यमंत्री ने कहा था कि फिल्म में तथ्यों से छेड़छाड की गई है. उन्होंने कहा था कि गलत तथ्यों को हटाए जाने के बाद ही फिल्म के रिलीज पर विचार किया जाएगा.


उन्होंने न सिर्फ अपने सूबे में फिल्म की रिलीज को बैन करने की घोषणा की है, बल्कि रानी पद्मावती को राष्ट्रमाता का दर्जा भी दे दिया. वो शिक्षा प्रणाली में भी पद्मावती को प्रमुखता से शामिल करने जा रहे हैं. चित्तौड़ की रानी पद्मावती के पाठ को अगले शैक्षणिक सत्र से मध्य प्रदेश के स्कूलों में पढ़ाया जाएगा.



हालांकि, राजपूत समाज के लोग अब भी फिल्म के रिलीज नहीं होने देने की बात पर कायम है. उनका कहना है कि राज्य सरकार ने फिल्म को पहले ही प्रतिबंधित कर दिया है. सरकार फैसले में कोई बदलाव करती है तो फिर समाज अपने स्तर पर कोई फैसला लेगा.