भोपाल। इंदौर में हुए डीपीएस बस हादसे के बाद परिवहन और गृह मंत्री भूपेंद्र सिंह ने मंगलवार को क्षेत्रीय परिवहन अधिकारियों व पुलिस के आला अफसरों की बैठक ली। इसमें उन्होंने सख्ती के साथ कहा कि मार्च 2018 के बाद 15 साल पुरानी बस को फिटनेस नहीं दी जाए। अगर किसी ऐसी बस को फिटनेस दी गई तो वह आरटीओ की व्यक्तिगत जिम्मेदारी होगी। सिंह ने क्षेत्रीय परिवहन अधिकारियों को खरी-खोटी सुनाते हुए कहा कि ज्यादातर अधिकारी पूरे समय दफ्तर में बैठे रहते हैं। अब तीन दिन ऑफिस में काम निपटाएं और चार दिन मैदानी दौरे कर चैकिंग आदि करें। 

गृह मंत्री ने कहा कि पंद्रह साल से पुराने स्कूल वाहनों को परमिट-फिटनेस देने पर संबंधित आरटीओ के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि परिवहन विभाग 30 जनवरी तक विशेष चेकिंग अभियान चलाए। इसके लिए पर्याप्त पुलिस बल उपलब्ध करवाया जाएगा। स्पीड गवर्नर और जीपीएस गुणवत्तापूर्ण होने चाहिए। वाहन में बैठने वाले बच्चों की संख्या निर्धारित की जाए और स्कूल वाहनों की गति 40 किलोमीटर प्रति घंटा से अधिक न हो। परिवहन आयुक्त ने कहा कि स्कूली बच्चों को लाने-ले जाने वाले ऑटो व वैन के संबंध में अभिभावकों से चर्चा के बाद फैसला लिया जाएगा। 

पालक भी समिति में शामिल होंगे

सूत्रों ने बताया कि बैठक में एसपी, कलेक्टर, आरटीओ की समिति में पालकों को भी शामिल किए जाने का फैसला लिया गया तो प्रमुख सचिव परिहवन मलय श्रीवास्तव ने यह सुझाव रखा कि जिस तरह विदेशों में बसों में सीट बेल्ट की व्यवस्था होती है, इसी तरह यहां भी व्यवस्था होना चाहिए। बैठक में यह भी तय किया गया कि खराब हालत की बसों के संचालन की जिम्मेदारी स्कूल प्रबंधन की होगी। साथ ही चालकों के प्रशिक्षण की व्यवस्था किए जाने का निर्णय भी लिया गया। 

यात्री बसों के समय में कम से कम पांच मिनट का फर्क हो

परिवहन मंत्री ने कहा कि यात्री बसों का समय सही हो, जिससे उनके बीच सवारियों को लेकर प्रतिस्पर्धा न हो। उन्होंने कहा कि दो बसों के रवानगी के समय में कम से कम पांच मिनट का अंतर हो। इन वाहनों की भी नियमित चेकिंग की जाए। बैठक में डीजीपी ऋषि कुमार शुक्ला, परिवहन विभाग के प्रमुख सचिव मलय श्रीवास्तव भी मौजूद थे।