मध्य प्रदेश में दाल खरीदी घोटाले में नरसिंहपुर के बाद तीन और जिलों के नाम शामिल हो गये है. साल 2017 में हुई दाल खरीदी में नरसिंहपुर के बाद होशंगाबाद, श्योपुर और रायसेन जिले में दाल खरीदी में गड़बड़ी सामने आई है.

प्रदेश में दाल खरीदी घोटाला में अब नया खुलासा हुआ है. नरसिंपुर में 17 करोड़ की दाल खरीदी घोटाला उजागर होने के बाद अब तीन नये जिलों होशंगाबाद, श्योपुर और रायसेन में दाल खरीदी में बड़ा गोलामाल सामने आया है.

तीनों जिलों में समर्थन मूल्य पर हुई दाल खरीदी के दस्तावेजों की पड़ताल के बाद सरकार में हड़कंप के हालात है.. दाल बेचने वाले किसानों के नाम, पता, और दाल का रकबा की पड़ताल में जो जानकारी मिली है. उसमें

-होशंगाबाद के पिपरिया में 818 टन दाल खरीदी

-श्योपुर में 109 टन घटिया दाल की खरीदी

-रायसेन में 633 क्विंटल दाल खरीदी में गड़बड़ी मिली है.

इस खुलासे के बाद प्रदेश के कृषि और दाल खरीदी करने वाली संस्था मार्कफेड में हड़कंप है. सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग ने इशारों-इशारों में गड़बड़ी की बात स्वीकारते हुए कहा कि नरसिंहपुर के बाद दूसरे जिलों में हुई गड़बड़ियों की जांच हो रही है. जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होगी.

दाल खरीदी घोटाले के बाद सरकारी सिस्टम एक बार फिर सवालों के घेरे में है, तो कांग्रेस भी हमलावर हो गई है. प्रदेश कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता केके मिश्रा ने कहा कि शिवराज सरकार पूरी तरह से घोटालों में लिप्त है. दाल घोटाला भी उसी का एक नमूना भर है.

गौरतलब है कि 2017 में हुई दाल खरीदी में मूंग की खरीदी 25 और उड़द की खरीदी 13 जिलों में हुई थी. लेकिन जिलों में दाल खरीदी को लेकर हुए फर्जीवाड़े से सरकार की नींद उड़ गई है. नरसिंहपुर में दाल खरीदी घोटाले में कलेक्टर रामराव भोंसले पर गाज गिर चुकी है, लेकिन अब सरकार उन जिलों के खिलाफ सख्त हो गई है..जहां अब नया खुलासा हुआ है.

रकबे से ज्यादा की दाल बेचने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के निर्देश है तो अधिकारी-कर्मचारियों के खिलाफ भी गाज गिरना तय हो गया है. लेकिन सरकार के पास इस सवाल का कोई जवाब नहीं है कि हाईटेक सिस्टम का दावा करने वाली व्यवस्था में आखिर सेंध क्यों लग रही है.