जबलपुर। चुनावी साल में बिजली मुद्दा न बन सके इसका सरकार पूरा ख्याल रख रही है। 2 महीने से बिजली के दाम को लेकर मंथन जारी है। शक्तिभवन से प्रस्ताव कई दफा मंत्रालय जा चुका है। हर बार फेरबदल के साथ फाइल वापस लौट आती है।

दिसंबर में मप्र विद्युत नियामक आयोग के पास बिजली कंपनी की याचिका जमा करनी थी, लेकिन दाम को लेकर एकराय नहीं बन पा रही थी। काफी हिसाब-किताब बनाने के बाद कंपनी और सरकार के बीच 4 फीसदी बिजली के दाम बढ़ाने पर रजामंदी बनी है। दाम यदि बढ़ते हैं तो प्रदेश के 47 लाख घरों पर इसका सीा असर होगा।

गरीबों को दी राहत

सरकार ने बिजली के दाम से गरीब तबके को बाहर रखा है। 0-50 यूनिट मासिक खपत वाले उपभोक्ता के लिए दाम नहीं बढ़ेंगे। प्रदेश में इस श्रेणी में करीब 49 लाख उपभोक्ता आते हैं।

इन पर पड़ेगा असर

जिन उपभोक्ता के घर में मासिक बिजली की खपत 51 यूनिट से ऊपर है, उन्हें ही बिजली के बढ़े दाम देने पड़ सकते हैं। हालांकि कंपनी के प्रस्ताव पर अभी मप्र विद्युत नियामक आयोग की मुहर लगनी बाकी है। आयोग दाम तय करने से पहले इंदौर, भोपाल और जबलपुर में जनसुनवाई आयोजित करता है, जिसके बाद 1 अप्रैल से नए दाम तय होते हैं।

42 लाख नए उपभोक्ता बनाने का लक्ष्य

मप्र में प्रानमंत्री की महात्वकांक्षी योजना सौभाग्य से 42 लाख घरों को बिजली से जोड़ा जाना है। इस काम के लिए बिजली कंपनी को बड़ी राशि खर्च करनी होगी। जिसकी भरपाई कंपनी उपभोक्ताओं से करेगी।

इनका कहना है

घरेलू बिजली के दाम करीब 4 फीसदी बढ़ाने की तैयारी हो रही है। अभी प्रस्ताव फाइनल नहीं हुआ है। 15 जनवरी तक प्रस्ताव आयोग के पास भेजा जाएगा - फिरोज मेश्राम, सीजीएम टैरिफ मप्र पावर मैनेजमेंट कंपनी