इंदौर। हादसे वाली बस का परमिट अक्टूबर में खत्म होने वाला था। इसके बाद उसका परमिट नहीं मिलता। प्रदेश में शैक्षणिक संस्थानों की बसों के लिए 20 साल का नियम है, जबकि यात्री बसों के लिए 15 साल। इसके बाद परिवहन विभाग उन्हें परमिट जारी नहीं करता है।


आरटीओ एमपी सिंह ने बताया उक्त बस को 2013 में 420 नंबर का परमिट दिया गया था। परमिट की अवधि 5 साल थी, जो इसी साल 10 अक्टूबर को खत्म हो रही थी। जबकि 6 जून को बस की आयु 15 साल पूरी हो रही थी।


प्रदेश में स्कूली बसों की आयु 20 साल है। तब तक उन्हें परमिट और फिटनेस देते हैं। इंदौर में पिछले डेढ़ साल से स्कूली बसों की आयु भी हमने 15 साल ही निर्धारित कर दी है। इस स्कूल की बस को इसके बाद परमिट नहीं दिया जाता।


यात्री बसों को कर देते हैं स्कूली बस में कन्वर्ट


शातिर बस संचालक अपनी यात्री बसों की उम्र अधिक होने पर उसका परमिट प्राप्त नहीं कर पाते हैं तो उन बसों पर पीला रंग पोतकर उन्हें स्कूलों में अटैच कर देते हैं।


ऐसे बचा रहे पैसा


स्कूलों में बस के नाम पर भारी शुल्क लेने वाले बस संचालक बसों में रिमोल्ड टायर डाल देते हैं। अधिकांश स्कूलों में अटैच वाहन हैं, जिनके मेंटेनेंस को लेकर कोई ध्यान नहीं देता है। कई स्कूलों के वाहनों की स्थिति भी काफी खराब है।