शनिवार दि॰ 06.01.18 को माघ कृष्ण पंचमी होने के कारण देवी त्रिपुरा सुंदरी का पूजन श्रेष्ठ रहेगा। त्रिपुर सुंदरी दस महाविद्याओं में से एक हैं। देवी भागवत के अनुसार त्रिपुर सुंदरी को ही आद्या शक्ति सती कहा जाता है। पिता दक्ष द्वारा अपमान से आहत होकर जब मां सती ने अपने प्राण उत्सर्ग कर दिये तो सती के वियोग में महेश्वर उनका पार्थिव शव अपने कंधों में उठाए चारों दिशाओं में घूमने लगे। इस महाविपत्ति को श्रीहरि के चक्र द्वारा सती के शव के 108 भागों में विभक्त कर दिया गया। इस प्रकार शव के टूकडे़ होने पर सती के शव के अंश जहां गिरे वहीं शक्तिपीठ की स्थापना हुई। उसी में एक त्रिपुर सुंदरी का स्थान है। महेश्वर को हृदय में धारण करने पर सती नैमिषारण्य वन में लिंगधारिणी नाम से विख्यात हुईं इन्हें त्रिपुर सुंदरी के नाम से जाना जाता है। कालिकापुराण के अनुसार त्रिपुर सुंदरी की दो भुजाएं हैं, यह गौर वर्ण की तथा लाल कमल पर विराजित हैं। पंचमी पर देवी त्रिपुर सुंदरी के विधिवत पूजन से जीवन में सुख शांति आती है, अखंड समृद्धि बनी रहती है व प्रेम में सफलता मिलती है।



विशेष पूजन विधि: घर की पश्चिम दिशा में पश्चिम मुखी होकर नीले कपड़े पर जल भरे स्टील के लोटे में 3 लौंग डालकर व नारियल रखकर कलश स्थापित कर त्रिपुरा सुंदरी का विधिवत पूजन करें। चमेली के तेल का दीप करें, लोहबान से धूप करें, सिंदूर चढ़ाएं, बिल्वपत्र चढ़ाएं, उड़द की खिचड़ी का भोग लगाएं तथा किसी माला से इस विशेष मंत्र का 1 माला जाप करें। पूजन के बाद भोग प्रसाद रूप में वितरित करें। 



पूजन मुहूर्त: शाम 16:09 से शाम 17:09 तक है।

पूजन मंत्र: ह्रीं श्रीं क्लीं त्रिपुर कामेश्वरी महायोगिने क्लीं श्रीं ह्रीं॥


 


उपाय


सुख-शांति हेतु त्रिपुरा सुंदरी पर चढ़े 7 बादाम किसी ब्राह्मणी को भेंट करें। 



अखंड समृद्धि हेतु त्रिपुरा सुंदरी के निमित सुगंधित तेल का पंचमुखी दीपक करें।



प्रेम में सफलता हेतु त्रिपुरा सुंदरी पर भोग गुड़-तिल के काली गाय को खिलाएं।