रायपुर। राजधानी समेत प्रदेशभर में प्रधानमंत्री उज्ज्वला गैस सिलेंडर की हवा निकल गई है। बीपीएल परिवार के करीब 8 लाख परिवार इसे रिफिल नहीं करा रहे हैं। नतीजा सरकार ने जिस मकसद से यह सिलेंडर बांटी है, वह पूरा नहीं हो पा रहा है।


अकेले रायपुर में बीपीएल परिवार से 40 फीसदी परिवार ही रिफिल करा पा रहे हैं। बाकी रसोई गैस कनेक्शन धारकों ने दोबारा गैस सिलेंडर रिफिल ही नहीं कराया है। कुछ ने तो पहला सिलेंडर खत्म होते ही अब परम्परागत चूल्हे पर ही खाना पका रहे हैं।


नईदुनिया ने राजधानी से लगे गांवों में ही पड़ताल की तो पाया कि लोग के पास इतने रुपये नहीं हैं कि हर दो माह में सिलेंडर रिफिल कराएं। 824 रुपये खर्च करने पर 200 से अधिक राज्य सरकार की सब्सिडी मिलने के बाद भी वे परेशानी झेल रहे हैं।


गौरतलब है कि गरीबों को लकड़ी व कंडे से निकलने वाले धुएं से निजात दिलाने के लिए रसोई गैस कनेक्शन के साथ सिलेंडर व चूल्हा आवंटित किया गया था। 2016-17 में प्रदेश में योजना की शुरुआत की गई। प्रारंभिक चरण में जिले के वनांचल गावों के साथ ही आदिवासी बहुल इलाके में रहने वाले गरीबों को योजना का लाभ दिलाने की योजना बनाई गई थी।


मजदूरी से चला रहे घर


धरसींवा इलाके में ग्रामीण सीमा सत्यवान मजदूरी करके घर चलाती हैं, उन्हें गैस सिलेंडर मिला, लेकिन अब इतना खर्च नहीं कर पा रहीं हैं कि वे इसकी खर्च बहन कर सकें। यही हाल गृहिणी रिजन बंसल का भी है। वे भी परेशान हैं। यहां के ग्राम पंचायत नेहुरडीह के सरपंच अश्विनी कुमार अडिल का कहना है कि उन्हें रसोई गैस जलाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है, लेकिन कमाई कम होने के कारण ये स्थिति निर्मित हो रही है।


कमाई नहीं होने से दिक्कत


ग्राम पंचायत नेऊरडीह की रहने वाली कुमारी बृजलाल और रोहिणी आनंद रामके मजदूरी करके परिवार चलाते हैं। बीपीएल परिवार को गैस सिलेंडर मिला लेकिन उतने पैसे नहीं है कि वे गैस की रिफलिंग करा सकें। कमोबेश यही स्थिति राज्य के आदिवासी व वनांचल क्षेत्र में है।


मुफ्त की गैस खत्म होने के बाद परेशानी


प्रधानमंत्री उज्जवला योजना के तहत छत्तीसगढ़ में सोलह महीने में 17 लाख 13 हजार 951 गरीब परिवार की महिलाओं को रसोई गैस कनेक्शन दिया जा चुका है। 13 अगस्त, 2016 को शुरू हुई इस योजना के तहत सिर्फ 200 रुपए के पंजीयन शुल्क पर प्रत्येक चयनित परिवार को निःशुल्क रसोई गैस कनेक्शन, डबल बर्नर चूल्हा और पहला भरा हुआ सिलेण्डर मुफ्त दिया जा रहा है। पहले महीने तो मुफ्त में मिलने से लोगों ने इसी से खाना बनाया, लेकिन अब रिफिल ही नहीं करा रहे हैं।


यहां इतने बांटे कनेक्शन


खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग अब तक राजनांदगांव में एक लाख 16 हजार 452, रायगढ़ में एक लाख 33 हजार 333, जांजगीर-चांपा में एक लाख 28 हजार 034, बिलासपुर में एक लाख 17 हजार 262 और महासमुंद में एक लाख तीन हजार 787 महिलाओं को रसोई गैस कनेक्शन दिया है।


जशपुर जिले में 85 हजार 420, बलौदाबाजार-भाटापारा में 84 हजार 961, कोरबा में 72 हजार 928, सरगुजा में 72 हजार 269, बस्तर में 71 हजार 393, रायपुर में 62 हजार 029, गरियाबंद में 61 हजार 896, कांकेर में 59 हजार 916, बलरामपुर-रामानुजगंज में 57 हजार 817, मुंगेली में 57 हजार 373, बालोद में 56 हजार 611, धमतरी में 55 हजार 826, सूरजपुर में 52 हजार 804, कबीरधाम में 52 हजार 779, दुर्ग में 50 हजार 107, बेमेतरा में 47 हजार 124, कोण्डागांव में 43 हजार 678, कोरिया में 42 हजार 041, दंतेवाड़ा में 12 हजार 504, नारायणपुर में पांच हजार 560, बीजापुर जिले में पांच हजार 261 और सुकमा में चार हजार 786 गरीब परिवार की महिलाओं को रसोई गैस कनेक्शन दिया जा चुका है।


अब प्रतिशत बढ़ा है


पहले 20 से 25 प्रतिशत था , बढ़कर 39 फीसदी हो गया है। यह तो बेहतर रूझान है। स्कीम पिछले साल ही शुरू हुई है , लोगों में धीरे-धीरे अवेयरनेस आ रहा है। - डोमन सिंह, संचालक, खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण