जबलपुर। व्यापमं घोटाले के 3 आरोपियों का 42 दिन बाद जेल से बाहर आने का रास्ता साफ हो गया है। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस हेमंत गुप्ता और जस्टिस विजय कुमार शुक्ला की खण्डपीठ ने उनकी जमानत मंजूर कर ली है। वहीं इंडेक्स मेडिकल कॉलेज के डायरेक्टर ने अपनी अर्जी वापस ले ली तथा एक अन्य की जमानत अर्जी को निरस्त कर दिया।


व्यापमं घोटाले में भोपाल सीबीआई की विशेष अदालत से जमानत अर्जियां खारिज होने के बाद 23 नवंबर से जेल में बंद चिरायु मेडिकल कॉलेज भोपाल के डीन डॉ वीरेन्द्र मोहन, पीपुल्स मेडिकल कॉलेज के डॉ सीपी शर्मा व इंडेक्स मेडिकल कॉलेज इंदौर के डायरेक्टर डॉ अरुण अरोरा की जमानत अर्जियां गुरुवार को मंजूर कर ली गईं।


वहीं इंडेक्स मेडिकल के पूर्व डीन डॉ स्वर्णा बिसारिया गुप्ता की अर्जी को कोर्ट ने खारिज कर दिया है। जबकि इंडेक्स मेडिकल के ही दूसरे डायरेक्टर डॉ एसएस भदौरिया की अग्रिम जमानत अर्जी वापस ले ली गई। गुरुवार को हुई सुनवाई के दौरान डॉ. वीरेन्द्र मोहन, डॉ. अरोरा व डॉ. शर्मा की ओर से अधिवक्ता ने तर्क दिया कि सीबीआई की विशेष अदालत में चालान पेश किया जा चुका है जिसके बाद मामले का विचारण लंबे समय तक चलने की संभावना है। इस बीच आवेदक एक माह से ज्यादा समय से जेल में हैं। उनसे पूछताछ भी हो चुकी है चूंकि आवेदक प्रतिष्ठित नागरिक हैं इसलिए उनके फरार होने की कोई संभावना नहीं है।


डॉ. अरोरा की ओर से अधिवक्ता शशांक शेखर ने पक्ष रखा। सीबीआई की ओर से असिस्टेंट सॉलिसिटर जनरल जेके जैन ने कहा कि आरोपियों को जमानत का लाभ नहीं दिया जाना चाहिए। कोर्ट ने जब यह पूछा कि क्या विचारण शीघ्रता से हो पाएगा तो उन्होंने कहा कि जल्द पूरे करने का प्रयास किया जाएगा।


अधिवक्ता ने कहा कि आरोपियों की अधिक संख्या को देखते हुए इमसें विलंब की संभावना से भी इंकार नहीं किया जा सकता है। इस पर कोर्ट ने तीनों की अर्जी स्वीकार करते हुए जमानत दे दी। विदित हो कि व्यापमं घोटाले में बनाए गए आरोपियों के खिलाफ धारा 409, 467, 468, 471, 420 व 120 बी आईटी एक्ट की धारा 65, 66 भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराएं 13 (1)(डी), 13 (2) व मान्यता प्राप्त परीक्षा अधिनियम की धारा 3 (डी) (1)(2), 4 के तहत सीबीआई ने प्रकरण दर्ज किए हैं।