इंदौर । गुरुवार को हाई कोर्ट की सुरक्षा में बड़ी चूक नजर आई। 96 पुलिसकर्मियों का बल होने के बावजूद लोग तख्ती लेकर प्रदर्शन करने हाई कोर्ट पहुंच गए। वे कड़ावघाट-मच्छी बाजार चौड़ीकरण मामले में दायर याचिका की सुनवाई अन्यत्र करने की मांग कर रहे थे।


सुरक्षा में हुई इस चूक को लेकर हाई कोर्ट बार एसोसिएशन ने भी एडीजी व डीआईजी को पत्र लिखकर कार्रवाई की मांग की है।


हाई कोर्ट की डिविजनल बेंच में गुरुवार को कड़ावघाट-मच्छीबाजार सड़क चौड़ीकरण को लेकर दायर याचिका में सुनवाई होना थी। सुबह करीब 10 बजे बड़ी संख्या में उक्त क्षेत्र के रहवासी हाई कोर्ट के गेट नंबर 1 के पास जमा हो गए। ये लोग हाथों में तख्तियां लिए थे, उन्होंने पार्किंग एरिया में भी प्रदर्शन किया।


सुरक्षा में शामिल एएसपी व सीएसपी स्तर के अधिकारी


हाई कोर्ट की सुरक्षा के लिए 96 पुलिसकर्मियों का बल तैनात है। इसमें एएसपी, सीएसपी स्तर के अधिकारी भी शामिल हैं। दिन ही नहीं रात के वक्त भी बड़ी संख्या में पुलिस कोर्ट परिसर में तैनात रहती है। प्रदर्शनकारी बेरोकटोक गेट नंबर एक के बाहर जमा हो गए जबकि गेट नंबर एक पर किसी सामान्य व्यक्ति को आने-जाने की अनुमति ही नहीं है।


डीआईजी हरिनारायण चारी मिश्र के मुताबिक अभी बार एसोसिएशन का पत्र नहीं मिला है। पत्र मिलने के बाद जांच कर उचित कार्रवाई की जाएगी।


कड़ी कार्रवाई होना चाहिए


यह गंभीर घटना है। हाई कोर्ट के लिए सरकार ने सुरक्षा के बेहतर इंतजाम किए हैं। इसके बावजूद लापरवाही हुई। जिम्मेदारों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होना चाहिए। हम इस संबंध में आला अधिकारियों को पत्र लिख रहे हैं। - मनोज द्विवेदी, अतिरिक्त महाधिवक्ता


कड़ावघाट से मच्छीबाजार तक तोड़फोड़ पर रोक जारी


इधर, हाई कोर्ट ने कड़ावघाट से मच्छीबाजार तक सड़क चौड़ीकरण के लिए तोड़फोड़ पर पूर्व में दिया स्टे 10 जनवरी तक बढ़ा दिया। इस मामले में रहवासियों की याचिका पर गुरुवार को जस्टिस पीके जायसवाल और जस्टिस वीरेंदरसिंह की बेंच में सुनवाई हुई। याचिकाकर्ताओं की तरफ से सीनियर एडवोकेट आनंद मोहन माथुर ने कोर्ट को बताया कि उनके सहयोगी सीनियर एडवोकेट और सांसद विवेक तनखा जबलपुर से उपस्थित नहीं हो सके हैं। इस पर कोर्ट ने स्टे जारी रखते हुए बहस 10 जनवरी तक बढ़ा दी।


गौरतलब है कि गंगवाल से सरवटे बस स्टैंड के बीच साढ़े पांच किमी लंबी सड़क प्रस्तावित है। नगर निगम ने 24 मीटर चौड़ी सड़क की जद में आने वाले निर्माणों पर निशान लगाए हैं। कड़ावघाट से मच्छी बाजार के रास्ते पर भी निशान लगाकर रहवासियों को निर्माण हटाने को कहा है। निगम की कार्रवाई के खिलाफ 6 रहवासियों ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की। 26 दिसंबर को सिंगल बेंच ने तोड़फोड़ पर रोक लगा दी थी। याचिका में कहा है कि कड़ावघाट से मच्छी बाजार की सड़क मास्टर प्लान में शामिल ही नहीं है, लेकिन निगम इसे मास्टर प्लान में बताकर तोड़फोड़ कर रहा है।