रायपुर। हाईस्पीड ट्रैक बिछाने में दो राज्यों के रेलवे मंडलों में आपसी तालमेल की कमी रही, इसे देखते हुए भारतीय रेलवे बोर्ड ने दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इसके मद्देनजर मंडलों के इंजीनियरों की टीम ने निर्माणाधीन ट्रैकों का निरीक्षण किया। इनमें आ रही अड़चनों को सूचीबद्ध कर उसे दूर करने का प्रयास हो रहा है। इसके लिए बाकायदा इंजीनियरों की एक टीम का गठन भी कर दिया गया है। इसकी रिपोर्ट पर लंबित कार्यों में तेजी लाने के प्रयास किए जाएंगे। वहीं मंडलों की संयुक्त रूप से टीम के सदस्य एक-दूसरे मंडल में ट्रैक बिछाने की जानकारी हासिल करेंगे। रेलवे के मुताबिक ट्रैकों पर 110 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से ट्रेनें चलेंगी। इसके लिए उन्हें एकीकृत व्यवस्था के तहत कार्यों की मॉनिटरिंग करने का खाका खींचने को कहा गया है।


हाईस्पीड ट्रेन दौड़ाने के लिए अभी तक ट्रैकों के बिछाने का कार्य पूरा नहीं हो सका है। इसके पीछे कारण यह कि रायपुर, बिलासपुर व नागपुर रेलवे मंडल को अलग-अलग ट्रैक बिछाने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। बिलासपुर जोन को ट्रैक बिछाने के लिए 160 करोड़ स्र्पए का बजट जारी किया जा चुका है, लेकिन कुछ ही हिस्सों में ट्रैक बिछाया जा सका है। अधिकांश स्टेशनों के मध्य काम शुरू नहीं हो सका है। बिलासपुर से नागपुर तक 430 किलोमीटर ट्रैक बिछाने का खाका तैयार किया गया है। इसके लिए तीसरी लाइन बिछाने का कार्य चल रहा है। हाईस्पीड ट्रेन को निर्बाध गति से चलाने के लिए पटरी के दोनों किनारों पर लोहे की बाड़ लगाई जाएगी। इसके टेंडर आदि की प्रक्रिया भी पूरी हो चुकी है, लेकिन तीनों मंडलों में अभी तक संबंधित एरिया के ठेकेदारों को वर्क ऑर्डर ही जारी नहीं किया गया है। बरहाल, हाईस्पीड की योजना की गति धीमी होने पर अब भारतीय रेलवे बोर्ड ने संज्ञान लिया है।


बनेगी एकीकृत व्यवस्था


रेलवे बोर्ड ने हाईस्पीड योजना को पूरा करने के लिए एकीकृत व्यवस्था के तहत सभी मंडलों की मॉनिटरिंग इंजीनियर करेंगे। इसके लिए कार्यों का भौतिक सत्यापन करने निर्देश है।


इनका कहना है


हाईस्पीड ट्रेन चलाने के लिए ट्रैक बिछाने का कार्य चल रहा है। अब एकीकृत व्यवस्था के तहत काम में तेजी लाई जाएगी। 


तन्मय मुखोपाध्याय, वरिष्ठ वाणिज्य मंडल प्रबंक, रायपुर