गुरुवार दि॰ 04.01.18 माघ कृष्ण तृतीया पर देवी गौरी का पूजन सर्वश्रेष्ठ रहेगा। शास्त्रनुसार हर मास की शुक्ल व कृष्ण पक्ष की तृतीया को सार्वजनीन रूप से गौरी पूजन का निर्देश है। भविष्यपुराण अनुसार माघ की तृतिया अन्य मासों की तृतिया से अधिक उत्तम है। माघ मास की तृतिया नारी को विशेष फल देती है। माघ मास की शुक्ल व कृष्ण पक्ष की तृतीया को सौभाग्य वृद्धिदायक गौरी तृतीया व्रत करने का विधान है। भविष्यपुराण के उत्तर पर्व में माघ की तृतीया के व्रत करने का वर्णन है जिससे व्यक्ति को सौभाग्य, धन, सुख, रूप, दीर्घायु व आरोग्य मिलता है। भविष्यपुराण के ब्रह्मपर्व में गौरी ने यम से कहा है कि इस दिन गुड़-लवण का दान श्रेष्ठ है। इस दिन जो महेश्वर के निमित ब्रह्मणों को लड्डू खिलाकर जल पिलाता है वे गौरी-शंकर को प्रिय हो जाता है। धर्मसिंधु के अनुसार इस दिन जो व्यक्ति गौरी-शंकर का विधिवत पूजन कर उनके निमित गरीबों में ईंधन, ऊनी वस्त्र, जूता, तेल, रजाई, गुड़, गेहूं का दान करता है उसके दांपत्य संबंध मधुर होते हैं, दुर्घटनाओं से सुरक्षा मिलती है व अविवाहितों का शीघ्र विवाह होता है।



विशेष पूजन विधि: गौरी-शंकर का विधिवत पंचोपचार पूजन करें। पीतल के दीए में सरसों के तेल का दीप करें, सुगंधित धूप करें। पीत चंदन चढ़ाएं, पीले फूल चढ़ाएं, लड्डू का भोग लगाएं। किसी माला से इस विशेष मंत्र का 1 माला जाप करें। पूजन उपरांत लड्डू ब्रह्मणों को भेंट करें। 



पूजन मुहूर्त: प्रातः 08:50 से प्रातः 09:50 तक है। 

पूजन मंत्र: ह्रीं गौर्ये नमः॥



उपाय

दुर्घटनाओं से सुरक्षा हेतु सेंधा नमक व गुड़ सिर से वारकर गरीबों को दान करें।



मधुर दांपत्य संबंधों हेतु किसी दंपत्ति को पीले रंग का ऊनी वस्त्र बाद करें।



अविवाहितों के शीघ्र विवाह हेतु गौरी-शंकर पर चढ़ा सरसों का तेल नवविवाहिता को दान करें।