जबलपुर। क्लिनिक जैसा कुछ नहीं। एक बड़ा सा हॉल और मरीजों की लंबी लाइन। नब्ज पकड़ने की फीस कुछ भी नहीं, लोग स्वेच्छा से 10 रुपए टेबल पर रख देते हैं। इससे ज्यादा रुपए रखने की इजाजत नहीं है। ये हैं सेना से रिटायर कैप्टन डॉ. मुनीश्वरचंद्र (एमसी) डावर का दवाखाना।


मरीजों की सेहत ठीक करने में तो माहिर हैं ही, लेकिन मरीजों के स्वास्थ्य को लेकर वे अपना एक संकल्प साथ लेकर चलते हैं। तंबाकू, बीड़ी, सिगरेट और शराब छोड़ने के स्लोगन अपने सामने ही मरीज के मोबाइल पर वाल पेपर के रूप में लगवाते हैं। इसी पहल के चलते डॉ. डावर के पास आने वाले 60 से 70 फीसदी मरीज तंबाकू और शराब छोड़ चुके हैं।

छोड़ दी तंबाकू


रायपुर से आने वाले मरीज एस. पटेल डॉ. डावर के पुराने मरीज हैं। डॉक्टर ने उन्हें तंबाकू छोड़ने की सलाह दी। पहले तो उन्होंने तंबाकू छोड़ दी, लेकिन एक बार फिर खाना शुरू कर दी तो डॉक्टर ने उनके मोबाइल पर वॉल पेपर स्लोगन 'जो बीवी-बच्चों से करे प्यार वह तंबाकू से करे इनकार" लगवा दिया। इसके बाद पटेल इसे देखकर परिवार की परवाह करते हुए तंबाकू छोड़ने लगे। धीरे-धीरे तंबाकू के व्यसन से मुक्त हो गए।


शराब भी छूट गई


शराब के आदी कई मरीजों की लत भी इस प्रयोग से छूट गई है। उन्हें बताया जाता है कि शराब पीने से लीवर सिरोसिस होता है जिससे मौत हो जाती है। डॉ. डावर ऐसे मरीजों के मोबाइल के वॉल पेपर पर भी शराब के नुकसान को परिवार से जोड़कर स्लोगन लगवाते हैं। इससे कई मरीजों ने शराब छोड़ दी।


इस तरह की सीख भी देते हैं...


0 कार में यदि मरीज आते हैं तो उनकी कार के स्क्रीन पर सीट बेल्ट लगाने का स्टीकर चिपका देते हैं। सीट बेल्ट क्यों लगाना चाहिए इसके बारे में भी वे कार चलाने वाले को बताते हैं।


0 स्कूटर, बाइक से जो मरीज आते हैं उन्हें हेलमेट लगाने की सलाह देते हैं। वे खुद 1974 से हेलमेट लगा रहे हैं।


स्लोगन के पीछे की वजह


जिनको तंबाकू व शराब की लत होती है, उनके दिल में कहीं न कहीं अपने परिवार के प्रति प्यार भी होता है, वे परिवार की परवाह करते हैं। यदि उनकी लत का दुष्प्रभाव परिवार को होने वाले नुकसान से जोड़कर बताया जाए तो भावनात्मक स्लोगन असर करते हैं। मोबाइल के वॉल पेपर पर लगे होने से जब व्यक्ति मोबाइल देखता है, तब उसे इसकी बुराई का अहसास होता है।


इनका कहना है


मैं यह काम पिछले करीब दो दशकों से कर रहा हूं। इसका फायदा मुझे देखने मिला है। जब मोबाइल नहीं था तब भी मरीजों को उनके परिवार का वास्ता देकर तंबाकू और शराब की लत छुड़वाने का प्रयास करता था। स्मार्ट फोन आने के बाद मैं मोबाइल के वॉल पेपर पर यह स्लोगन लगवा रहा हूं।


डॉ. कैप्टन (रिटा.) एमसी डावर, फिजीशियन