भितरवार (ग्वालियर)। ग्वालियर जिले के भितरवार विकासखंड के अंतर्गत आने वाले जौरा गांव में रविवार की सुबह टीबी से पीड़ित एक महिला की मौत हो गई है। परिजनों ने स्वास्थ्य विभाग पर आरोप लगाते हुए बताया कि विभाग के डॉड्स केंद्र की ओर से पिछले छह माह से दवा देना बंद कर दिया था, इसके चलते यह मौत हुई है।


वहीं उन्होंने यह भी बताया कि गांव में और भी लोग टीबी से ग्रसित हैं, जिस पर विभाग का कोई ध्यान नहीं है।


प्राप्त जानकारी के अनुसार जौरा गांव में रहने वाली रूपवती (22) पत्नी रानू आदिवासी को रविवार की सुबह साढ़े 8 बजे खून की उल्टियां शुरू हो गईं। इसके बाद परिजन महिला को अस्पताल लेकर आए, जहां पर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।


रूपवती का डॉड्स केंद्र पर वर्ष 2015 और 2016 में इलाज चला था, इसके बाद से वर्ष 2017 में महिला पर विभाग की ओर से कोई ध्यान नहीं दिया और न ही इसे कोई दवा दी गई। टीबी की बीमारी को खत्म करने के लिए 6 माह और 9 माह का कोर्स होता है, लेकिन यहां पर महिला को पिछले छह माह से कोई दवा का वितरण नहीं किया गया। वहीं, पिछले डेढ माह पूर्व हरसी गांव में स्थित आदिवासी दफाई में भी हल्के पुत्र प्रभु आदिवासी की भी टीबी से मौत हो चुकी है।


आशा कार्यकर्ता की रहती है जिम्मेदारी


जिस गांव में टीबी के मरीज होते हैं, वहां पर स्वास्थ्य विभाग की ओर से आशा कार्यकर्ता या स्वयं सेवक को जिम्मेदारी दी जाती है कि वह टीबी से पीड़ित मरीज को स्वयं ही दवा खिलाएं। इसके लिए संबंधित को 250 रुपए का मानदेय भी दिया जाता है।


जौरा गांव में पिछले करीब 6 माह से किसी को भी दवाएं नहीं दी गई। स्वास्थ्य विभाग की ओर से ग्रामीण क्षेत्रों में किसी प्रकार के कोई कैंप नहीं लगाए जाते हैं। इससे टीबी व अन्य बीमारियों से ग्रसित लोगों का इलाज नहीं हो पाता है। मृतका के पति ने बताया कि गांव में पिछले करीब एक वर्ष से कोई कैंप नहीं लगा है। यदि यहां पर स्वास्थ्य विभाग की ओर से ध्यान दिया जाता तो आज उसकी पत्नी जिंदा होती।


इन गांवों में सबसे अधिक परेशानी


भितरवार ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले हरसी, बाजना, गोहिंदा, धोबट, डोंगरपुर, मूढरी, बागबई, खरौली, आदिवासी दफाई आदि जगहों पर करीब 50 से अधिक लोग टीबी से ग्रसित हैं। इसके बावजूद भी इस ओर स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोई ध्यान नहीं दिया गया है। ग्रामीण रामनरेश, होतम सिंह आदि ने बताया आदिवासी दफाई में लोग टीबी से पीड़ित हैं, जहां पर उन्हें दवाएं समय पर नहीं मिल पा रहीं हैं। इस संबंध में शिकायत भी की गई थी, लेकिन इसके बावजूद यहां पर किसी ने कोई ध्यान नहीं दिया है।