हिन्दू, धर्म में तुलसी के पौधे की नियमित पूजा का प्रावधान है। धर्मग्रंथों में कहा गया है कि इससे भगवान विष्णु एवं मां लक्ष्मी की कृपा शीघ्र प्राप्त होती है। तुलसी को औषधि के रूप में भी प्रयोग किया जाता है। इसके कई औषधीय गुण हैं परंतु तुलसी से जुड़े ऐसे उपाय भी हैं, जिससे आपको सौभाग्य की प्राप्ति हो एवं सभी बाधाओं से मुक्ति मिले।



कार्य की सफलता हेतु : तुलसी की जड़ को एक दिन पूर्व निमंत्रण देकर आएं। अगले दिन उसे प्रणाम कर अपने घर लेकर आएं। घर पहुंच कर इसे गंगाजल से धोएं एवं पूजा करें। इसके बाद इसे दाईं बाजू पर पीले कपड़े में लपेट कर बांध लें। पूजन के समय तुलसी के मंत्र का जाप करें इससे कार्य सफल होंगे व आर्थिक समस्या दूर होगी।



बीमारी से मुक्ति हेतु : स्वास्थ्य खराब हो जाए या किसी की बुरी नजर लगने पर तुलसी के 7 पत्ते एवं 7 काली मिर्च मुट्ठी में लें फिर पीड़ित व्यक्ति को लेटा दें। बंद मुट्ठी से उसके सिर से लेकर पैर तक 21 बार ॐ ॐ मंत्र बोल कर वारना करें, फिर काली मिर्च उसे खाने को दें और तुलसी के पत्ते की गोली बनाकर पानी से निगलने को दें। अब पीड़ित व्यक्ति को दोबारा लेटा कर उसके तलवों को किसी कपड़े से  7  या 11 बार झाड़ दें।



धन प्राप्ति हेतु : यदि आप आर्थिक रूप से समृद्ध होना चाहते हैं, तो अपने घर के मुख्य द्वार के दोनों ओर तुलसी के पौधे गमले में लगा कर रखें। रोज तुलसी की पूजा-अर्चना करें। इससे नकारात्मक ऊर्जा दूर होगी व सकारात्मक ऊर्जा बढ़ जाएगी। इसके साथ-साथ वीरवार को तुलसी को दूध चढ़ाएं एवं शाम को तेल का दीया रोज जलाएं। इससे पैसों की परेशानी से मुक्ति मिलेगी। तुलसी को रोज सुबह जल चढ़ाएं।



अशुभ स्वप्न से मुक्ति : प्रात: तुलसी के समक्ष अशुभ स्वप्न सुनाने से उसका दुष्प्रभाव समाप्त हो जाता है।



संतान जिद्दी हो : यदि संतान कहना न मानती हो तो घर की पूर्व दिशा में रखे तुलसी के पौधे के तीन पत्ते रविवार छोड़कर रोज खिलाएं। संतान सुधरने लगेगी।



कन्या के विवाह हेतु : यदि कन्या का विवाह नहीं हो पा रहा हो तो तुलसी को दक्षिण-पूर्व दिशा में रख कर रोज कन्या जल अर्पित करे एवं शाम को दीप दान करे तो उसे शीघ्र योग्य वर की प्राप्ति होगी।



सुख-समृद्धि हेतु : हिन्दू धर्म में तुलसी को माता के रूप में पूजा जाता है। तुलसी जी के आठ नाम बताए गए जिन्हें रोज सुबह लेने से जीवन में आने वाले संकट से मुक्ति मिलती है।  जीवन में कभी किसी चीज का अभाव नहीं रहता। ये इस प्रकार है : 1. वृंदा, 2. वृंदावनि, 3. विश्व पूजिता, 4. विश्व पावनी, 5. पुष्प धारा, 6. नंदिनी, 7. तुलसी, 8. कृष्ण जीवनी।



भगवान श्रीकृष्ण के तुलादान के समय समस्त वस्तुएं कम पड़ गई थीं लेकिन केवल एक तुलसी दल (पत्र) से कृष्ण जी का पलड़ा ऊपर हो गया था, यही तुलसी जी की महिमा है।