जबलपुर। आने वाले साल में हो सकता है कि मरीजों को इलाज के लिए शहर-शहर घूमने की जरूरत ही न पड़े। छोटी सी छोटी और बड़ी से बड़ी बीमारी के लिए डॉक्टर्स की सलाह, दवाएं सारी व्यवस्थाएं लोगों को उनके स्मार्टफोन में ही मिलेंगी। टेक्नोलॉजी की दुनिया में हमने एक कदम और आगे बढ़ा लिया है। नए साल में ये सुविधाएं हमारी मुश्किलों को और भी आसान कर देंगी।

2018 में टेलीमेडिसिन सर्विस के शुरू होने से हर तबके के लोगों को सही डॉक्टर्स, सही इलाज मिल सकेगा, वो भी कम पैसों में। अभी तक जिन बीमारियों के इलाज के लिए हमें शहर से बाहर जाना होता था, अब हम घर बैठे उन बीमारियों के लिए कौन सा डॉक्टर सही है और ट्रीटमेंट कहां लेना है ये आसानी से बिना किसी खर्च के जान सकेंगे। इतना ही नहीं टेलीमेडिसिन के दौरान वीडियो क्रॉन्फ्रेंस के जरिए किसी छोटे हॉस्पिटल में भी यदि इलाज हो सकता है तो यहां के डॉक्टर्स करेंगे। मेडिकल सेक्टर में भी होम सर्विस की तरह कार्य करेगा टेलीमेडिसिन।


रोबोटिक सर्जरी


शहर में भी आने वाले कुछ सालों में रोबोटिक सर्जरी की सुविधा भी शुरू हो सकती है। मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर्स इसके लिए अप्रोच कर रहे हैं। 2018 में नहीं लेकिन आने वाले 5 सालों में मेडिकल कॉलेज में भी रोबोटिक सर्जरी की सुविधा शुरू हो सकती है। ये शहर के लिए एक बड़ी उपलब्धि होगी। इस तकनीक से मरीजों की सुरक्षा और भी बढ़ जाएगी। साथ ही सर्जन्स का वर्कलोड कम हो जाएगा। यदि निजी अस्पताल 2018 में ही इस सुविधा को शुरू कर देते हैं तो इसमें आश्चर्य नहीं होगा।


टेलिमेडिसिन- टेलीमेडिसिन में शहर के सभी डॉक्टर्स ऑनलाइन सेवाएं प्रदान करेंगे। वीडियो क्रॉन्फेंसिंग के जरिए इलाज होगा।


कब- 2018 से।


कहां- शासकीय मेडिकल कॉलेज में शुरू होने जा रहा।


सुविधा- टेलिमेडिसिन की शुरुआत होने से लोगों को कम पैसों के साथ ही वक्त की बचत करते हुए इलाज उपलब्ध होगा। दमोह के मरीज को इलाज के लिए जबलपुर आने की जरुरत नहीं होगी। यहां के डॉक्टर्स वहां के डॉक्टर से संपर्क कर मरीज का इलाज वीडियो क्रॉन्फ्रेंस से करेंगे।


हाई डेफिनेशन सर्जरी- हाई डेफिनेशन सर्जरी में ज्यादातर ऑपरेशन लेजर तकनीक से किए जाएंगे।


कब- 2018 से


कहां- अभी तक निजी अस्पतालों में ये तकनीक इस्तेमाल की जा रही है, आने वाले साल से शासकीय मेडिकल कॉलेज में भी ज्यादा से ज्यादा सर्जरी लेजर तकनीक से की जाएंगी।


सुविधा- लेजर तकनीक से सर्जरी होने से मरीजों को तकलीफ कम होगी। मरीजों को ज्यादा समय तक अस्पतालों में भर्ती नहीं रहना पड़ेगा। वे सर्जरी के कुछ घंटे बाद ही चलने लगेंगे। बच्चों का इलाज भी लेजर तकनीक से होगा। ये सबसे बड़ा बदलाव होगा। अभी तक बच्चों के लिए लेजर सर्जरी को इस्तेमाल नहीं किया जाता था।


जीरो फेको तकनीक- जीरो फेको तकनीक से मोतियाबिंद का ऑपरेशन होगा। इस तकनीक के आ जाने से अल्ट्रा साउंड एनर्जी की जरुरत नहीं होगी। इससे पहले फेको तकनीक में अल्ट्रा साउंड एनर्जी के माध्यम से मोतियाबिंद को मथ के सोख लिया जाता था। लेकिन अब जीरो फेको तकनीक से मोतियाबिंद को अत्यंत सूक्ष्‌म कणों में बांट कर उसे बाहर निकाला जा सकेगा। इसके लिए अल्ट्रा साउंड एनर्जी की जरुरत नहीं होगी।


कब- निजी अस्पतालों में ये तकनीक दिसंबर 2017 से आ चुकी है।


कहां- शासकीय अस्पतालों में भी जल्द ही इसकी शुरुआत होगी।


सुविधा- अल्ट्रा साउंड एनर्जी का इस्तेमाल करने से आंखों को खतरा होता था। अब मरीज का मोतियाबिंद का इलाज सुरक्षित होगा। बिना किसी डर के।


बच्चों में भी लेजर तकनीक से होगी सर्जरी


अभी तक 30% सर्जरी लेजर से की जा रही थीं, लेकिन आने वाले साल में कोशिश है कि हाई डेफिनेशन सर्जरी पर काम किया जाए। इसमें वक्त ज्यादा लगता है, लेकिन जब ये प्रैक्टिस पर आ जाएगा, तो इसकी संख्या भी 70प्रतिशत तक बढ़ सकती है। खास तौर से बच्चों पर अभी तक लेजर तकनीक से सर्जरी नहीं हो रही थी, अब ओपन सर्जरी का स्थान 3 मिलीमीटर हाई डेफिनेशन सर्जरी ले लेगी। 2018 के लिए सबसे बड़ा बदलाव यही होगा।


डॉ.विकेश अग्रवाल, प्राध्यापक, शिशु शल्य चिकित्सक, मेडिकल कॉलेज


सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल की सुविधा


जल्द ही मेडिकल कॉलेज में सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल की सुविधा मिलेगी। जिससे हाई डेफिनेशन सर्जरी संभ हो पाएगी। आधुनिक उपकरणों की सहायता से लोगों का इलाज आसान हो जाएगा। कम तकलीफ में एक या दो दिनों में बड़ी से बड़ी सर्जरी के बाद उन्हें अस्पताल से छुट्टी से दी जाएगी। नेविगेशन के द्वारा मरीज का पूरा ब्यौरा डॉक्टर के पास होगा। मरीज के लिए सुरक्षित दवाईयां क्या हैं, आने वाले समय में उसे किन बीमारियों से खतरा है। ये सारी जानकारी पहले से मिल जाएगी।


डॉ.वायआर यादव, न्यूरो सर्जन, मेडिकल कॉलेज


टेलिमेडिसिन से मिलेगा फायदा


आने वाले साल में इलाज काफी आधुनिक हो जाएगा। टेलिमेडिसिन के द्वारा लोगों को सही इलाज उनके ही शहर में मिल पाएगा। इसके साथ ही मोतियाबिंद का इलाज जीरो फेको तकनीक द्वारा होगा। जो कि सुरक्षित होने के साथ ही सुविधाजनक भी है। इसमें मरीज को किसी भी तरह का कोई खतरा नहीं होगा।


डॉ.पवन स्थापक, नेत्र रोग विशेषज्ञ