सोमवार दि॰ 25.12.17 को पौष सप्तमी व पूर्वाभद्रपदा नक्षत्र के कारण शिव अवतार नंदीश्वर का पूजन श्रेष्ठ रहेगा। यह अवतार बैल के रूप में अवतरित हुआ था। पौराणिक मतानुसार परम शिव भक्त शिलाद मुनि ब्रह्मचारी थे। वंश वृद्धि की कामना से शिलाद ने इंद्र को तप से प्रसन्न कर मृत्युहीन पुत्र का वरदान मांगा। इंद्र की असर्मथता पर शिलाद ने शिव को प्रसन्न किया उनके ही समान मृत्युहीन व अयोनिज पुत्र का वर मांगा। महादेव ने स्वयं यहां भूमि से उत्पन्न बालक के रूप शिलाद के पुत्र में अवतरण लिया। शिलाद ने उसका नाम नंदी रखा। मुनि मित्रा व वरुण ने नंदी के अल्पायु होने की भविष्यवाणी की। नंदी ने मृत्यु को जीतने हेतु वन जाकर शिव आराधना की। महादेव ने नंदी को अजर अमर व शोक विहीन होने का वर दिया व अपना प्रधान गण नियुक्त किया। मरुतों की पुत्री सुयशा के साथ नंदी का विवाह हुआ। महादेव की प्रतिज्ञा अनुसार जहां नंदी का निवास होगा महादेव स्वयं वहीं निवास करेंगे। नंदीश्वर अवतार के विशेष पूजन व उपाय से भौतिक इच्छाओं की पूर्ति होती है, शारीरिक कष्ट दूर होते हैं, व भक्त को प्रोफैशनल सफलता मिलती है।



विशेष पूजन: शिवालय जाकर शिवलिंग व नंदी का विधिवत पूजन करें। तिल के तेल का दीप करें, चंदन से धूप करें, सफेद चंदन चढ़ाएं, सफेद तिल चढ़ाएं, दूध चढ़ाएं, सफेद फूल चढ़ाएं, खीर का भोग लगाकर 108 बार विशिष्ट मंत्र जपें। इसके बाद खीर गरीबों में बाटें।



पूजन मंत्र: ॐ तत्पुरुषाय विद्महे चक्रतुन्दय धीमहि। तन्नो नंदी: प्रचोदयात॥



पूजन मुहूर्त: प्रातः 09:05 से प्रातः 10:05 तक।



उपाय

शारीरिक कष्ट दूर करने हेतु पानी में अपनी छाया देखकर नंदी पर चढ़ाएं। 


 


इच्छाओं की पूर्ति हेतु शिवालय में चढ़ा पंचामृत गरीब कन्या को दान करें।



प्रोफैशनल सफलता हेतु शिवालय में नंदी पर चढ़ा चांदी का सिक्का तिजोरी में स्थापित करें।