शुक्रवार दि॰ 22.12.17 को पौष शुक्ल चतुर्थी पर विनायक चतुर्थी का पर्व मनाया जाएगा। भविष्य पुराण, चतुर्वर्ग चिंतामणि व कृत्य-कल्पतरु शास्त्रों ने इसे इसे गणपति चतुर्थी कहा है। ज्योतिष्शास्त्र अनुसार गणेशजी चतुर्थी तिथि के स्वामी व केतु ग्रह के अधिपति हैं। मोक्षकारक ग्रह केतु मायावी ग्रह राहु से विरोधाभास रखता है। विनायक चतुर्थी का व्रत हर महीने में वार के अनुसार होता है। शुक्रवार पर पड़ने वाली शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को शुक्रवारीय विनायक चतुर्थी कहते हैं। शुक्रवारीय विनायक चतुर्थी पर गणेशजी के लक्ष्मी-विनायक के पूजन का विधान है। श्वेत वर्ण के लक्ष्मी-विनायक के दोनों ओर उनकी पत्नियां रिद्धी-सिद्धि हाथ में सफेद कमल लिए विराजमान है। देवी रिद्धी से प्रक्रम व सिद्धि से उपलब्धि प्राप्त होती है। अष्ट भुजाधारी लक्ष्मी-विनायक ने अपने हाथों में अभय मुद्रा, तोता, अनार, तलवार, पाश, अंकुश, कल्पवृक्ष कमंडल धारण किए हुए है। विनायक चतुर्थी पर लक्ष्मी-गणपति के विशिष्ट पूजन उपाय व व्रत से आपार धन की प्राप्ति होती है, पैसों की तंगी दूर होती है तथा दुर्भाग्य से छुटकारा मिलता है।



विशेष पूजन विधि: गणपती का विधि-वत पूजन करें। आटे से बने दिए में चौमुखी घी दीप करें, चंदन से धूप करें, गुलाबी फूल चढ़ाएं, अबीर से तिलक करें, दही व रोटी का भोग लगाएं तथा रुद्राक्ष की माला से इस विशेष मंत्र का 1 माला जाप करें। पूजन के बाद दही व रोटी सफेद गाय को खिला दें।



पूजन मुहूर्त: प्रातः 08:10 से प्रातः 09:10 तक। 



पूजन मंत्र: गं गणपतए आगच्छ आगच्छ फट्॥


 


उपाय

दुर्भाग्य से मुक्ति हेतु लक्ष्मी-विनायक पर चढ़ी मुलतानी मिट्टी जलप्रवाह करें। 


 


पैसों की तंगी दूर हेतु लक्ष्मी-विनायक पर चढ़े चावल के 11 दाने पर्स में रखें।


 


आपार धन की प्राप्ति हेतु लक्ष्मी-विनायक पर चढ़ा मोतिशंख तिजोरी में स्थापित करें।