मध्य प्रदेश के ग्वालियर में जनजाति विभाग के तीन बैंक खातों से छात्रों के वजीफा का 34 लाख चोरी छुपे शराब कारोबारियों के खातों में ट्रांसफर करने का सनसनीखेज मामला सामने आया है. पुलिस ने बैंक कर्मचारी सहित पांच लोगो के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.


मामला यूनियन बैंक की सराफा ब्रांच से जुड़ा है. आरोप है कि जनजाति विभाग के खाते में जमा पैसे बैंक के सहायक प्रबंधक रहे हिमांशु की आईडी से दूसरे लोगों के खाते में पहुंचाया गया था.


दरअसल, सहायक प्रबंधक के पद पर रहे हिमांशु की शराब ठेकेदारों और बड़े कारोबारियों से दोस्ती थी. हिमांशु को पता था कि बैंक में कितने खाते साइलेंट है जब उसके दोस्त कारोबारियों को पैसे की जरूरत पड़ती थी तो वह साइलेंट खातों में जमा रकम को अपने दोस्तों के खातों में ट्रांसफर कर देता था. जनजाति विभाग के अलावा बैंक के कई और ग्राहकों ने भी अपने खाते से दूसरे खाते में ट्रांसफर करने की शिकायत की है.


करीब 10 करोड़ से ज्यादा के फर्जीवाड़े का पता चला है. फ्रॉड का मास्टरमाइंड बैंक का तत्कालीन सहायक प्रबंधक हिमांशु अग्रवाल है.



बैंक की रीजनल ब्रांच से जांच रिपोर्ट मिलने के बाद कोतवाली पुलिस ने हिमांशु सहित शराब ठेकेदार चंद्रभान सिंह गुर्जर, मेडिकल स्टोर संचालक लवलेश बंसल, श्री साईं साड़ी सेंटर के संचालक सहित अस्थाई कर्मचारी सुरेश कुशवाहा को गबन और धोखाधड़ी का आरोपी बनाया है इनके खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.