तुलसी को घर में रखने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। सनातन धर्म में इसे देवी का दर्जा दिया गया है। बहुत सारी धार्मिक कथाओं में इसका व्याख्यान किया गया है। श्रीहरि विष्णु के भोग में तुलसी को अर्पित करना अनिवार्य है। जिस घर में तुलसी का पौधा स्थापित नहीं होता, वहां कभी भी महालक्ष्मी अपना वास स्थापित नहीं करती। शास्त्र कहते हैं जिस घर के आंगन में तुलसी रोपित होती है वहां अकाल मृत्यु, रोग और शोक प्रवेश नहीं कर पाते। सुबह शाम तुलसी दर्शन से पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। ज्योतिष और वास्तु शास्त्रियों का मानना है की तुलसी का पौधा घर में सकारात्मकता का संचार करता है। 



तुलसी पूजन के समय मंत्रों का जाप अक्षय पुण्य प्रदान करता है। सूर्यास्त के बाद ये मंत्र बोलते हुए तुलसी को दीपक लगाएं। घर का वातावरण सुखद बनेगा एवं धन व बरकत के द्वार खोलने के लिए यह सर्वोत्तम मार्ग है। इससे घर में व्यापत वास्तु दोष का नाश होता है। तुलसी पूजन करने वाले व्यक्ति को शारिरिक समस्याएं नहीं होती। 



तुलसी पूजा के मंत्र


तुलसी जी को जल चढ़ाते समय इस मंत्र का जाप करना चाहिए।


महाप्रसाद जननी, सर्व सौभाग्यवर्धिनी आधि व्याधि हरा नित्यं, तुलसी त्वं नमोस्तुते।।



विशेष- तुलसी का पौधा यदि सूख जाए तो उसे घर में रखना अशुभ होता है। उसे जड़ सहित उखाड़ कर किसी पवित्र नदी में प्रवाहित कर दें। तुलसी का पौधा जून, जुलाई, अगस्त माह में लगाया जाए तो शीघ्र अंकुरित होता है। तुलसी पत्र को जब भी तोड़े तो मंजरी के पास के पत्ते तोड़ने चाहिए ताकि तुलसी की बढ़त अधिक हो।