सैन फ्रांसिस्को के एक इलाके में तैनात सुरक्षा रोबोट ‘के-9’ पर बेघर लोगों का उत्पीड़न का आरोप लगा है। इसके बाद रोबोट को उसके काम से बर्खास्त करके वहां से हटा दिया गया है। आरोप है कि रोबोट सड़क किनारे गश्त करके बेघर लोगों को टेंट लगाने से रोक रहा था। यह हर मिनट सैकड़ों तस्वीर खींचता था, जिससे लोगों की निजी जिंदगी प्रभावित हो रही थी। 

लोगों ने आरोप लगाया कि यह रोबोट सिर्फ गरीब और बेघरों पर कार्रवाई कर रहा है। 'द सैन फ्रांसिस्को सोसाइटी फॉर द प्रिवेंशन ऑफ क्रूएल्टी टू एनिमल' ने इस रोबोट को तैनात किया था। ताकि रोबोट संस्थान के आसपास के इलाके में गश्त कर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत कर सके, जिससे कार चोरी और सामान उठाने जैसे अपराध में कमी आए।

संस्थान की अध्यक्ष जेनिफर स्कारलेट का कहना है कि रोबोट ने जान बूझकर बेघर लोगों को परेशान नहीं किया। रास्ते पर सोने वालों को तंग नहीं किया। वहीं संस्थान के कैंपस के पास में स्थित कैंप में रहने वाले लोगों का आरोप है कि रोबोट ने उन्हें निशाना बनाया है। स्कारलेट के मुताबिक लोगों ने रोबोट को बांधा, उसके साथ तोड़फोड़ की और उसके सेंसर पर सॉस फेंक दी। उनका कहना है कि संस्थान के बाहर बड़ी संख्या में टेंट हैं और वहां गाड़ियां खड़ी रहती हैं।

इस रोबोट को बनाने वाली कंपनी नाइटस्कूप के मुताबिक गलत खबरें फैलाई गई हैं कि यह रोबोट बेघर लोगों को हटाने के लिए लाया गया था। इसका मकसद सिर्फ उनकी ग्राहक संस्था की सुरक्षा को बढ़ाना था और वह इसमें सफल भी रही। रोबोट की तैनाती के बाद चोरी की घटनाओं में कमी आई थी।

रोबोट के हाथों हो चुके हैं दो कत्ल

जुलाई, 2015 में जर्मनी में स्थित कार कंपनी फोक्सवैगन के प्लांट में एक रोबोट ने 22 साल के कर्मचारी को मेटल प्लेट के बीच में डालकर मार डाला था। उसी साल अगस्त महीने में भारत के गुरुग्राम में मारुति के प्लांट में 47 साल के मजदूर रामजी रोबोट की चपेट में आकर मारे गए थे।