मंगलवार दि॰ 19.12.17 को संध्या के समय पौष शुक्ल द्वितीया पर चंद्र दर्शन पर्व मानकर पूजन किया जाना उत्तम रहेगा। द्वितीया तिथि चंद्रमा की दूसरी कला है। इस कला का अमृत कृष्ण पक्ष में स्वयं सूर्यदेव पी कर स्वयं को ऊर्जावान रखते हैं व शुक्ल पक्ष में पुनः चंद्रमा को लौटा देते हैं। शुक्ल पक्ष की द्वितीया को भगवान शंकर गौरी के समीप होते हैं अतः शिवपूजन, रुद्रभिषेक, पार्थिव पूजन व विशेष रूप से चंद्र दर्शन व पूजन अति शुभ माना गया है। चंद्र दर्शन हर महीने अमावस्या के बाद जब पहली बार चंद्रमा आकाश पर दिखता है उसे चंद्र दर्शन कहते हैं। शास्त्रनुसार इस समय चंद्र दर्शन करना अत्यंत फलदायक होता है। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार चंद्रमा मन व ज्ञान का स्वामी माना जाता है। कुंडली में अशुभ चंद्रमा होने से मानसिक विकार, माता को कष्ट, धन हानि की सम्भावना रहती है। अतः दूज पर चंद्र दर्शन और विधिवत चंद्रदेव के पूजन से मैंटल टैंशन से मुक्ति मिलती है, अत्यधिक क्रोध से छुटकारा मिलता है तथा सौभाग्य की प्राप्ती होती है। 



पूजन विधि: संध्या के समय चंद्रदेव का दशोंपचार पूजन करें। गौघृत का दीपक करें, कर्पूर जलाकर धूप करें, सफ़ेद फूल, चंदन, चावल, व इत्र चढ़ाएं, खीर का भोग लगाएं व पंचामृत से चंद्रमा को अर्घ्य दें तथा सफेद चंदन की माला से 108 बार इस विशिष्ट मंत्र का जप करें। पूजन के बाद भोग किसी स्त्री को भेंट करें।



चंद्र दर्शन मुहूर्त: शाम 17:23 से शाम 18:26 तक।



चंद्र पूजन मुहूर्त: शाम 17:00 से शाम 18:00 तक। 



पूजन मंत्र: ॐ श्रीं चन्द्राय जितेन्द्रियाय नमः॥



उपाय

क्रोध से छुटकारा पाने हेतु चंद्रदेव को दूध-शहद से अर्घ्य दें।



मैंटल टैंशन से मुक्ति हेतु पानी में छाया देखकर चंद्रदेव पर चढ़ाएं।



सौभाग्य की प्राप्ती हेतु चंद्रदेव पर चढ़ा चांदी का सिक्का घर की तिजोरी अथवा दुकान के गल्ले में स्थापित करें, बरसेगा भरपूर धन।