पंचतंत्र के अनुसार जिनके पास धन है, वे युवा हैं। जो धनहीन हैं, वे शीघ्र वृद्ध हो जाते हैं। वस्तुत: भौतिक जीवन में धन का स्थान अति महत्वपूर्ण है। इसके महत्व को हमारे ऋषियों ने स्वीकार करके इसे धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष, पुरुषार्थ में सम्मिलित किया। नीति शास्त्र कहता है कि न्यायपूर्वक धन उपार्जित करना चाहिए। न्यायपूर्वक अर्जित किए हुए धन से जातक का अपना कल्याण होता है। धन के दान को श्रीकृष्ण ने सात्विक दान की संज्ञा दी है। धर्म और काम ‘अर्थ’ पर ही आधारित हैं। वास्तव में चारों पुरुषार्थ एक-दूसरे के विरोधी नहीं पूरक हैं। धन से काम के पूरा होने पर मोक्ष का द्वार प्रशस्त होता है। अत: प्रयत्नपूर्वक तथा उचित मार्ग से धन का उपार्जन करना चाहिए। 


लक्ष्मी प्राप्ति के उपाय

श्री सूक्त लक्ष्मी जी की प्रार्थना है। आद्यगुरु शंकराचार्य ने श्री सूक्त की प्रशंसा करते हुए इसे लक्ष्मी का प्राण तथा श्रीयंत्र को लक्ष्मी का शरीर भी कहा है। श्रीयंत्र साक्षात लक्ष्मी का प्रतीक है। यह भौतिक और आर्थिक उन्नति में सहायक होता है। यह 272 प्रकार का होता है। इनमें स्फटिक से निर्मित सुमेरू पर्वत के समान मेरू पृष्ठी श्रीयंत्र सर्वश्रेष्ठ है।जिस घर में स्फटिक श्रीयंत्र स्थापित होता है, उसमें विद्यमान वास्तुदोषों का निवारण स्वत: ही हो जाता है और परिवार में समृद्धि आती है। शुभ-मुहूर्त में श्रीयंत्र की स्थापना एवं पूजा करनी चाहिए। स्फटिक के अतिरिक्त चांदी अथवा तांबे के पत्र पर उभरे हुए श्रीयंत्र की स्थापना कर पूजन किया जा सकता है। 


पुष्य नक्षत्र युक्त रविवार को बहेड़े की जड़ और पौधा लाकर उनका पूजन करें। पूजन के पश्चात उन्हें लाल कपड़े में बांधकर तिजोरी में रखें। धन में वृद्धि होगी।


चांदी का एक सिक्का लाल वस्त्र में लपेटकर तिजोरी में रखें अथवा घर के द्वार पर टांग दें। यह टोटका धन वृद्धि में सहायक होता है।