इंदौर । एक्सपायर्ड दवा वापस नहीं लेने के फैसले का खेरची दवा व्यापारियों ने विरोध शुरू कर दिया है। दुकानदारों के मुताबिक जीएसटी की आड़ में थोक कारोबारियों ने वापस होने वाली दवाओं पर कमीशन पहले ही बढ़ा दिया था। केमिस्ट एसोसिएशन के फैसले पर सवाल उठाते हुए दुकानदार आरोप लग रहे हैं कि एसोसिएशन सिर्फ होलसेलर्स के हितों के हिसाब से निर्णय ले रहा है। यदि निर्णय वापस नहीं हुआ तो खेरची कारोबारी मुद्दे पर एसोसिएशन से अलग जाकर मोर्चा खोल देंगे।


रिटेल दवा कारोबारियों के मुताबिक 1 जुलाई से जीएसटी लागू होने के ठीक बाद से ही थोक दवा कारोबारियों ने एक्सपायर्ड दवाओं की वापसी पर ना-नुकुर शुरू कर दी थी। नियम स्पष्ट नहीं होने की बात कहकर जुलाई और अगस्त में एक्सपायर्ड दवाएं वापस नहीं हुई। दुकानदारों के मुताबिक सितंबर में ऐसी दवाओं को वापस लेना फिर शुरू किया गया लेकिन थोक कारोबारियों ने उस पर कमीशन बढ़ा दिया।


सितंबर के बाद से एक्सपायर्ड दवा वापस लेने पर थोक कारोबारी 45 प्रतिशत कमीशन ले रहे हैं यानी कोई एक्सपायर्ड दवा वापस की जाती है तो उसकी एमआरपी से 45 प्रतिशत राशि कम कर उस कीमत का माल दिया जाता था। रिटेल कारोबारियों के मुताबिक इससे पहले तक ऐसी दवा वापसी पर 30-35 प्रतिशत तक कमीशन काटा जाता था। असल में कंपनी थोक कारोबारियों से ऐसा माल वापस लेने पर सिर्फ 28 प्रतिशत ही कमीशन काटती है।


हर बिल का विवरण


जीएसटी के जानकार थोक कारोबारियों के इस फैसले को कागजी कार्रवाई से बचने की कोशिश के तौर पर देख रहे हैं। सीए अंजना लखोटिया के मुताबिक नए कर कानून में अब जरूरी हो गया है कि पहले बेचे जाने के बाद वापस आने वाली वस्तुओं का क्रेडिट नोट बेचवाल को बनाना होगा। वापसी के ऐसे क्रेडिट नोट हर इनवॉयस यानी बिल के अनुसार तैयार होंगे।


कारोबारी यह नहीं कर सकता कि कुल जमा हिसाब अपने जीएसटी के खातों में दिखा दे। हर बिल के हिसाब से क्रेडिट नोट का विवरण रिटर्न में देना कई कारोबारियों को मुश्किल लग सकता है। हो सकता है इसी कागजी कार्रवाई से बचने के लिए ऐसे निर्णय लिए जा रहे हैं।


निराश न हो


परिस्थितियों को देखकर अभी निर्णय लिया है। 25 जनवरी के बाद सरकार नीतियों के हिसाब से हमें राहत की उम्मीद है। रिटेलर्स को परेशान नहीं होना चाहिए क्योंकी यूं भी दवा वापसी के लिए 4 महीने का समय दिया जाता है। यदि सब ठीक रहा तो जनवरी की एक्सपायर दवा अप्रैल-मई तक वापस हो सकेगी। - विनय बाकलीवाल, अध्यक्ष इंदौर केमिस्ट एसोसिएशन