मुंबई  चीन  पर नजर रखने के लिए भारतीय नौसेना में अब कलवरी पनडुब्बी को शामिल किया गया है। स्कॉर्पीन श्रेणी की यह पहली पनडुब्बी है जो भारतीय नौ सेना के बेड़े में शामिल किया गया है। इसके आने के बाद से चीन के लिए भारत की तरफ आंख उठाना आसान नहीं होगा। इस पनडुब्बी को हिंदमहासागर में तैनात किया जाएगा। 

प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी ने कलवरी को नौसेना में शामिल करते हुए कहा, 'आईएनएस कलवरी पनडुब्बी को राष्ट्र को समर्पित करना मेरे लिए बहुत सौभाग्य की बात है। आज 125 करोड़ भारतीयों के लिए बहुत गौरव का दिन है।' उन्होंने कलवरी को 'मेक इन इंडिया' का उत्तम उदाहरण बताया। 


मोदी ने कहा, 'समुद्र के रास्ते आतंकवाद हो, ड्रग तस्करी हो या गैरकानूनी तौर पर मछली पकड़ना, भारत इन सबसे निपटने में अहम भूमिका निभाता रहा है। पिछले तीन साल में रक्षा और सुरक्षा से जुड़े पूरे पारिस्थितिकी तंत्र में बदलाव की शुरुआत हुई है। इस साल जम्मू-कश्मीर में 200 से ज्यादा आतंकी मारे गए।' 


समारोह में रक्षा  मंत्री निर्मला सीतारमण, नौसेना प्रमुख ऐडमिरल सुनील लांबा, वाइस ऐडमिरल गिरीश लूथरा, पश्चिमी नौसेना कमान के कमांडिंग ऑफिसर और शीर्ष रक्षा अधिकारी शामिल हुए। 


प्रधानमंत्री बोले 'पूरा किया वादा' 


प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, 'हमने सैनिकों के लिए वन रैंक वन पेंशन का वादा किया था, उसे पूरा किया। कई दशकों से लंबित यह मांग अब हकीकत में बदल चुकी है।' 


एमडीएल ने बनाई 

भारतीय नौसेना के प्रॉजेक्ट-75 के तहत मझगांव डॉक लिमिटेड (एमडीएल) ने मुंबई में फ्रांसीसी नौसैनिक रक्षा और ऊर्जा कंपनी डीसीएनएस द्वारा तैयार की गई पनडुब्बियों का निर्माण किया है। 


कलवरी की खूबियां 


- एकॉस्टिक गुणवत्ता, कम विकिरणित शोर स्तर, हाइड्रो-डायनामिक रूप से अनुकूलित आकार 


- सटीक निर्देशित हथियारों का उपयोग करते हुए दुश्मन पर हमला करने की क्षमता 


कलवरी नाम क्यों? 

कलवरी का नाम एक खतरनाक टाइगर शार्क के नाम पर रखा गया है, जो हिंद महासागर के गहरे समुद्र में पाया जाता है।