वास्तु से न सिर्फ घर का वातावरण प्रभावित होता है बल्कि ऊर्जा पर भी असर होता है। जीवन के छोटे से लेकर बड़े पहलू पर यह अपना वर्चस्व स्थापित करता है। वास्तु की मानें तो सोने के कमरे से लेकर सोने की स्थिति तक, सोने से पहले और आंख खुलने तक नकारात्मक और सकारात्मक प्रभाव से हर व्यक्ति रूबरू होता है। यहां तक की विश्राम के लिए उपयोग होने वाला बेड भी अच्छी और बुरी ऊर्जा का स्त्रोत होता है। शुभता के लिए और कंगाल होने से बचने के लिए कुछ नियमों का पालन करना चाहिए। सोते समय पैर दरवाजे की तरफ नहीं होने चाहिए। इससे देवी लक्ष्मी नाराज हो जाती हैं। सिर दक्षिण दिशा में और पैर पश्चिम दिशा में रखें। 



शाम को सूर्यास्त के पश्चात घर में झाडू न लगाएं। रात में खाना खाने के पश्चात बर्तन झूठे न छोड़ें, उन्हें उसी समय स्वच्छ करके रखें। ऐसा करने से लक्ष्मी घर में निवास करती हैं और दरिद्रता दूर होती है।



जो व्यक्ति ब्रह्म मुहूर्त में उठकर, स्नान करके भगवान की पूजा करता है, लक्ष्मी उस पर प्रसन्न होती हैं। जो व्यक्ति दिन में और रात्रि में दक्षिण की ओर मुंह करके मल-मूत्र का त्याग करता है, लक्ष्मी उस पर प्रसन्न रहती हैं।



अपने तकीए के पास घड़ी रखकर न सोएं, चिन्ता और परेशानी बनी रहती है। राहत भरी नींद का आनंद नहीं आता।



बेड के बीच में बिजली से चलने वाले सामान को न रखें। ऐसा करने से पाचन संबंधी समस्याएं बनी रहती हैं।



बेडरूम में मंदिर न बनाएं।



शयन कक्ष में पूर्वजों के चित्र नहीं रखने चाहिए।



दंपति के बेडरूम में हल्का गुलाबी प्रकाश सदा रखें, इससे उनके बीच का प्रेम सदा परवान चढ़ता रहेगा।