वास्तु-शास्त्र की दृष्टि से मकान सही ढंग से निर्मित न होने पर जातक को निम्र प्रकार की समस्याएं जीवनपर्यंत बनी रहती हैं : 


उस घर में हमेशा तनाव व कलह बनी रहती है।


घर में बीमारी बनी रहती है।


उस घर में खुशी और प्रसन्नता व्याप्त नहीं होती।


सही ढंग से धन का आगमन नहीं होता और दरिद्रता बनी रहती है।


घर के मुखिया पर हमेशा कर्जा बना रहता है।


घर के जातक को बार-बार आत्महत्या करने की इच्छा होती है।


वह जातक सदैव परेशान एवं दुखी रहता है। 


उस घर की स्त्रियां एवं लड़के-लड़कियां अक्सर गलत राह पर चलने लगते हैं।


उसके लड़के कुपात्र बनते हैं और उस जातक को जीवन में अच्छा वातावरण नहीं मिलता।


उसकी पत्नी और उसके मध्य निरंतर मतभेद बना रहता है।


वह जातक अनेक समस्याओं से घिरा रहता है।


राजकीय बाधाएं उसे निरंतर परेशान करती रहती हैं। पूरा जीवन उन राजकीय बाधाओं से ही जूझने में बीत जाता है।


उसके ऊपर कोई-न-कोई मुकद्दमा चलता ही रहता है। पड़ोसियों से तथा अन्य लोगों से निरंतर लड़ाई-झगड़ा होता रहता है और वह उस समय अपने आपे में नहीं रहता।


वह कभी स्वस्थ नहीं रहता और निरंतर स्वयं में बेचैनी का अनुभव करता रहता है।


यदि वह जातक व्यापारी है तो उसे व्यापार में आए दिन किसी न किसी प्रकार की कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है और यदि वह नौकरी करता है तो उसे हर क्षण अपनी नौकरी जाने का खतरा बना रहता है।


वह मान-सम्मान, यश और प्रतिष्ठा को प्राप्त नहीं कर पाता।


उसके घर में चोरी या अन्य प्रकार की आकस्मिक दुर्घटनाएं घटती ही रहती हैं। 


अगर उपर्युक्त घटनाएं या इनमें से कुछ बिंदु आपके घर में हैं तो समझिए कि आपका मकान वास्तु-शास्त्र की दृष्टि से सही नहीं बना है।