नई दिल्ली अपने दूसरे बच्चे की मौत की खबर सुनने के बाद वर्षा बेसुध हैं। सुध आता भी है तो सिर्फ आंसू बहते हैं। बड़ी मुश्किल से बात करने की स्थिति में आईं। कहा- तीन साल बाद जिंदगी में वह पल आया था, जिसका इंतजार था। परिवार में सब खुश थे। नए मेहमान के स्वागत की जरूरी तैयारियां कर ली थीं लेकिन मैक्स अस्पताल ने जिंदगी की हर खुशी को छीन लिया। मेरे दोनों बच्चे अब दुनिया में नहीं हैं। अब सोचती हूं कि काश किसी सरकारी अस्पताल में गई होती तो शायद यह नहीं होता। वर्षा ने कहा कि मैक्स अस्पताल के डॉक्टरों ने उनके इलाज में लापरवाही बरती। बताया कि जब तक वह ऐडमिट रहीं, कोई भी डॉक्टर उनसे अच्छे से बात नहीं करता था। वर्षा ने कहा- मेरा जैसा इलाज होना चाहिए था, वैसा नहीं हुआ। मैं चाहती हूं कि जिस डॉक्टर ने मेरे जिंदा बच्चे को मृत बताया, उसे गिरफ्तार किया जाए। मैक्स अस्पताल पर ताला जड़ा जाए ताकि कोई और मां इस तरह से दुखी न हो। 30 नवंबर को डिलिवरी के बाद से ही वर्षा मैक्स में ऐडमिट थीं लेकिन बुधवार को तीन बजे जब उन्हें बच्चे की मौत की खबर मिली तो वह सिहर गईं। वर्षा ने कहा, 'मैं सन्न रह गई। आंखों के सामने अंधेरा छा गया। कुछ समझ में नहीं आ रहा था। ऐसा लग रहा था कि अस्पताल मुझे काटने को दौड़ रहा है। इसलिए मैं वहां से हर हाल में निकलना चाहती थी। न चाहते हुए भी वहां से बाहर आ गई।' वर्षा ने कहा कि सरकार से बहुत उम्मीद थी लेकिन न तो केंद्र ने, न ही राज्य सरकार ने कुछ किया। इतनी बड़ी घटना के बाद भी किसी ने उनकी सुध नहीं ली। 

 

वर्षा ने कहा, 'लापरवाही तो हुई है। घटना के बाद भी हुई है। मैं पूरे दिन बेड पर पड़ी रहती थी, कोई पूछने वाला नहीं था। कोई डॉक्टर आ भी जाता तो वह ठीक से बात नहीं करता था। सर्जरी के बाद मेरा जिस तरीके से इलाज होना चाहिए था, वह नहीं हुआ।' वर्षा ने कहा कि वह सभी गर्भवती महिलाओं से कहना चाहती हैं कि कोई इस अस्पताल में इलाज कराने न आए। 

6 दिन तक लड़ता रहा 'मृत' बच्चा 

मैक्स हॉस्पिटल की गंभीर लापरवाही से बीते गुरुवार को मृत घोषित किए गए जिंदा बच्चे की छठे दिन (बुधवार) मौत हो गई। इलाज करने वाले डॉक्टर ने बच्चे की मौत की पुष्टि कर दी है। अग्रवाल अस्पताल के डायरेक्टर डॉक्टर संदीप गुप्ता ने बताया बच्चे की हालत पहले दिन से ही खराब थी, उसका जिंदा बच पाना मुश्किल था लेकिन, हमारी टीम ने पूरी कोशिश की बावजूद इसके हम उसे बचा नहीं पाए। डॉक्टर गुप्ता ने कहा कि बच्चे की मौत की वजह मल्टीऑर्गन डिसफंक्शन है। डॉक्टर गुप्ता ने एनबीटी से बात करते हुए कहा कि बच्चा 30 नवंबर से ऐडमिट था। उसके इलाज के लिए एक टीम बनाई गई थी, जिसमें नियोनेटल, न्यूरॉलजी, मेडिसिन सहित अन्य जरूरी डिपार्टमेंट के डॉक्टरों को रखा गया था लेकिन, बच्चा शुरू से ही कमजोर था, उसका वजन सिर्फ 600 ग्राम था। इंफेक्शन हो गया था, प्लेटलेट्स बन नहीं रहे थे, ब्लीडिंग हो रही थी, किडनी में दिक्कत थी। उन्होंने कहा कि बच्चे का कोई भी ऑर्गन पूरी क्षमता के साथ काम नहीं कर पा रहा था। इसकी सबसे बड़ी वजह प्रीमैच्योर डिलिवरी और उसका वजन था।

डॉक्टर गुप्ता ने कहा कि ऐसे बच्चों में एक साथ कई दिक्कतें होती हैं, इसलिए बचना मुश्किल हो जाता है। बच्चे के इलाज के लिए जब पहले दिन ब्लड जांच की गई तो उसमें इंफेक्शन मिला था। बाद में ब्लीडिंग होने लगी। बॉडी स्ट्रक्चर मैच्योर नहीं हो पा रहा था, उसे मैक्सिमम डोज पर दवा दी जा रही थी। बावजूद उसमें रिकवरी नहीं दिख रही थी। बुधवार दोपहर 12 बजकर 8 मिनट पर उसकी मौत हो गई। हमें दुख है कि हम बच्चे को बचा नहीं पाए। इस बारे में मैक्स हेल्थकेयर प्रशासन ने एक बयान जारी कर कहा है, 'बच्चे की मौत की दुखद खबर मिली। वह लाइफ सपोर्ट पर था। बयान में कहा गया है कि हमारी संवेदनाएं अभिभावकों और परिवार के अन्य सदस्यों के साथ हैं।' 

 

अस्पताल के पास सिर्फ 48 घंटे 

सरकार की प्रारंभिक रिपोर्ट में तो अस्पताल को दोषी पाया गया है और अब सरकार को फाइनल रिपोर्ट का इंतजार है। इस बीच सरकार दिल्ली नर्सिंग होम ऐक्ट के तहत अस्पताल के खिलाफ क्या-क्या कार्रवाई की जा सकती है, इस पर स्टडी कर रही है। हेल्थ मिनिस्टर सत्येंद्र जैन ने बताया कि अगले दो से तीन दिन में फाइनल रिपोर्ट आ जाएगी और उसके बाद कानून के हिसाब से सख्त से सख्त कार्रवाई का फैसला लिया जाएगा। हेल्थ मिनिस्टर ने बताया कि मैक्स अस्पताल में एक बच्चे की मौत के मामले के साथ-साथ ईडब्ल्यूएस कैटिगरी में इलाज को लेकर भी काफी कमियां पाई गईं थीं। 22 नवंबर को अस्पताल को नोटिस भेजा गया था। नोटिस के मुताबिक मैक्स अस्पताल को डेंगू के समय बुखार के मरीजों के इलाज के लिए 10 से 20 पर्सेंट अडिशनल बेड बढ़ाने की इजाजत दी गई थी लेकिन डेट खत्म होने के बाद भी अस्पताल न केवल इन बेड के लिए मरीजों को भर्ती कर रहा था बल्कि इन अडिशनल बेड का यूज नॉन-फीवर मरीजों के ट्रीटमेंट के लिए भी किया जा रहा था। इन दोनों मसलों पर अब सरकार कार्रवाई करेगी। 

 

हेल्थ मिनिस्टर ने कहा कि जिस दिन सरकार के सामने मैक्स अस्पताल का यह मामला आया था, उसके दो घंटे के भीतर जांच बिठा दी गई थी और प्रारंभिक जांच रिपोर्ट भी आ गई है। प्रारंभिक रिपोर्ट में काफी कमियां पाई गई हैं और कानून के हिसाब से सरकार को फाइनल रिपोर्ट का इंतजार करना होगा। दो से तीन दिन की बात है और फाइनल रिपोर्ट के बाद कार्रवाई पर फैसला ले लिया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि प्राइवेट अस्पतालों के खिलाफ जो भी शिकायतें आ रही हैं, उनको देखा जा रहा है। बिलिंग को लेकर काफी शिकायतें हैं और हर शिकायत की जांच हो रही है। सरकार प्रारंभिक रिपोर्ट को गंभीरता से ले रही है, क्योंकि इस रिपोर्ट के आधार पर यह एक प्रकार का आपराधिक लापरवाही का मामला नजर आ रहा है। यही वजह है कि सरकार अब इस रिपोर्ट के आधर पर सभी कानूनी पक्षों से सलाह ले रही है।