रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा है कि अगले साल होने वाले राष्ट्रपति चुनावों में वो एक और कार्यकाल के लिए उम्मीदवार बनेंगे.

 

उन्होंने ये बात, एक कार फ़ैक्ट्री के मज़दूरों की सभा में भाषण देते हुए कही.

 

उन्होंने कहा, "मैं रूसी संघ के राष्ट्रपति पद के लिए अपनी उम्मीदवारी का दावा पेश करूंगा."

 

पुतिन साल 2000 से ही कभी राष्ट्रपति तो कभी प्रधानमंत्री के रूप में सत्ता में बने हुए हैं.

 

अगर वो अगले साल मार्च में होने वाला चुनाव जीत जाते हैं तो उनका कार्यकाल 2024 तक बढ़ जाएगा.

 

रूसी टीवी पत्रकार सेनिया सोबचाक पहले ही कह चुकी हैं कि वो इन चुनावों में खड़ी होंगी, लेकिन ओपीनियन पोल्स के हिसाब से लगता है कि पुतिन आसानी से जीत जाएंगे.

 

रूस के मुख्य विपक्षी नेता एलेक्सेई नवाल्नी को आधिकारिक रूप से चुनाव में हिस्सा लेने से प्रतिबंधित कर दिया गया है क्योंकि धोखाधड़ी के एक मामले में उन्हें दोषी पाया गया है. हालांकि वो इसे राजनीति से प्रेरित बताते हैं.

 

अधिकांश रूसी लोगों के बीच पुतिन की छवि एक हीरो की है. वो उन्हें एक मजबूत नेता मानते हैं जिसने सीरियाई गृहयुद्ध में निर्णायक सैन्य हस्तक्षेप कर रूस की वैश्विक छवि को फिर से ज़िंदा किया है. यूक्रेन से क्रीमिया को अलग किए जाने का श्रेय भी लोग पुतिन को देते हैं.

 

लेकिन उनके आलोचक आरोप लगाते हैं कि वो भ्रष्टाचार को बढ़ावा देते हैं और क्रीमिया को ग़ैरक़ानूनी तरीक़े से अलग किए जाने के उनके कदम से रूस को अंतरराष्ट्रीय जगत में आलोचना का शिकार होना पड़ा है.

 

एक जासूस से राष्ट्रपति तक का सफ़र

पुतिन का जन्म 7 अक्टूबर 1952 को लेनिनग्राद (अब पीटर्सबर्ग) में हुआ था.

उन्होंने क़ानून की पढ़ाई की और ख़ुफ़िया एजेंसी केजीबी में शामिल हो गए.

तत्कालीन कम्युनिस्ट पूर्वी जर्मनी में उन्होंने एक जासूस के रूप में काम किया था. उस दौरान के उनके जासूस दोस्तों को पुतिन के राज में ऊंचे पद हासिल हुए.

1990 के दशक में सेंट पीटर्सबर्ग के मेयर एनातोली सोबचाक के वो मुख्य सहयोगी थे. एनातोली ने उन्हें क़ानून पढ़ाया था.

1997 में वो बोरिस येल्तसिन के कार्यकाल में क्रेमलिन आए और उन्हें फ़ेडरल सिक्युरिटी सर्विस का मुखिया बना दिया गया. उसके बाद उन्हें प्रधानमंत्री बना दिया गया.

1999 में नए साल के मौके पर येल्तसिन ने इस्तीफ़ा दे दिया और पुतिन को कार्यकारी राष्ट्रपति नामित किया.

पुतिन ने मार्च 2000 के राष्ट्रपति चुनावों में आसानी से जीत हासिल की.

2004 के आम चुनावों में जीतकर उन्हें दूसरा कार्यकाल भी मिला.

रूसी संविधान के तहत तीसरी बार राष्ट्रपति बनने की दावेदारी प्रतिबंधित है. इसलिए वो तीसरे कार्यकाल में प्रधानमंत्री बने.

2012 में आम चुनावों में जीत हासिल कर उन्हें राष्ट्रपति का तीसरा कार्यकाल मिला.