गुरुवार दि॰ 07.12.17 पौष कृष्ण पंचमी पर गुरु पुष्य योग होने के कारण श्रीलक्ष्मी-नारायण का पूजन श्रेष्ठ रहेगा। पुष्य नक्षत्र को तिष्य व अमरेज्य भी कहते हैं। अमरेज्य का अर्थ है, देवताओं द्वारा पूजित। बृहस्पति को अत्यधिक प्रिय शनि का नक्षत्र पुष्य नक्षत्रराज कहा जाता है। विवाह को छोड़कर इसमें किया गया कोई की कार्य स्वार्थ सफलता प्रदान करता है। इस योग में लक्ष्मी-नारायण के ऐसे चित्र का पूजन किया जाता है जिसमें क्षीर सागर के बीच शेषनाग की शय्या पर महादेवी लक्ष्मी नारायण की सेवा में लीन हों तथा विष्णु की नाभि से कमल उत्पन्न होकर ब्रह्मा का सृजन कर रहा है। नारायण अपने नीचे वाले बाएं हाथ में पद्म कमल, नीचे वाले दाएं हाथ में कौमोदकी गदा, ऊपर वाले बाएं हाथ में पाञ्चजन्य शंख व अपने ऊपर वाले दाएं हाथ में सुदर्शन चक्र धारण किए हुए हों तथा नारायण ने कौस्तुभ मणि व शार्ङ्ग धारण किए हुए हैं। गुरु-पुष्य योग होने पर लक्ष्मी-नारायण का पूजन धन-धान्य की संपन्नता देता है, ऐश्वर्यवान जीवन प्रदान करता है व भाई-बहन के रिश्ते से कलह को खत्म करता है। 

 

विशेष पूजन विधि: भगवान लक्ष्मी-नारायण का उत्तरमुखी होकर विधिवत पूजन करें। पूजन में पीले वस्त्र व लाल आसान का प्रयोग करें। गौघृत में हल्दी मिलाकर दीप करें, सुगंधित धूप करें। केसर चढ़ाएं। गैंदा के फूल चढ़ाएं, बेसन से बने मिष्ठान का भोग लगाएं। तुलसी पत्र चढ़ाएं तथा चंदन की माला से इस विशेष मंत्र का 1 माला जाप करें। पूजन के बाद भोग प्रसाद रूप में वितरित करें। 

 

पूजन मुहूर्त: दिन 14:05 से शाम 15:05 तक है। 

 

पूजन मंत्र: श्रीं सत्यलोकपालकाय नमः॥

 

उपाय

ऐश्वर्यवान जीवन हेतु श्रीलक्ष्मी-नारायण पर चढ़ी शहद गाय को खिलाएं।

   

पारिवारिक कलह मुक्ति हेतु कर्पूर से पीली सरसों जलाकर लक्ष्मी-नारायण की आरती करें।

 

धन-धान्य की संपन्नता हेतु श्री लक्ष्मी नारायण पर चढ़ी हल्दी से तिजोरी पर "श्रीँ" लिखें।