इंदौर । किसी समय एचआईवी पॉजीटिव गर्भवती के लिए बच्चे को जन्म देना किसी सपने से कम नहीं था। उन्हें न घर में जगह मिलती थी न अस्पताल में। बच्चे को जन्म दे भी दिया तो उसके संक्रमित होने की आशंका रहती थी। अब परिस्थितियां बदल रही हैं। एमवायएच में ऐसी महिलाओं ने 503 बच्चों को जन्म दिया। इनमें से 484 स्वस्थ्य हैं। 503 में से 125 से ज्यादा सीजर भी शामिल हैं। इस साल अब तक 56 ऐसी महिलाओं की डिलीवरी अस्पताल में कराई जा चुकी है। दो महिलाएं फिलहाल भर्ती हैं।

 

यह संभव हुआ है एमवाय अस्पताल के स्त्री एवं प्रसूति विभाग के डॉक्टरों की वजह से। 2005 तक हालत यह थी कि गर्भवती के एचआईवी पॉजीटिव पाए जाने पर उसके प्रसव के लिए न डॉक्टर तैयार होते थे न नर्सिंग स्टाफ। सभी को आशंका रहती थी कि कहीं संक्रमण उन्हें अपनी चपेट में न ले ले।

 

ऐसी विकट परिस्थिति में 2006 में अस्पताल की प्रोफेसर डॉ. सुमित्रा यादव ने एचआईवी पॉजीटिव महिलाओं के प्रसव कराने की जिम्मेदारी संभाली। 11 साल में अस्पताल में 90 हजार से ज्यादा महिलाओं की काउंसलिंग हो चुकी है। इनमें 339 महिलाएं पॉजीटिव निकलीं। इन सभी का प्रसव अस्पताल में कराया गया। दूसरे अस्पतालों से भी एचआईवी पॉजीटिव गर्भवती अस्पताल रैफर हुईं।

 

बदल रहा है परिदृश्य, सास अस्पताल लेकर आ रही पॉजीटिव बहू को

 

डॉ. यादव ने बताया कि शुरुआत में काउंसलिंग में दिक्कतें आती थीं, लेकिन अब परिस्थितियां बदल रही हैं। अब सास एचआईवी पॉजीटिव बहू को अस्पताल लेकर पहुंच रही हैं। अस्पताल में काउंसलिंग के दौरान महिलाओं को बताया जाता है कि कैसे बच्चे को एचआईवी से बचाया जा सकता है। इसके लिए दवाइयों के साथ लाइफ स्टाइल में बदलाव भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

 

माता-पिता के साथ मिलने आते हैं बच्चे

 

डॉ. यादव ने बताया कि माता-पिता में से किसी एक के भी एचआईवी पॉजीटिव होने पर बच्चे के पॉजीटिव होने की आशंका ज्यादा रहती है। जरूरी है कि ऐसे माता-पिता बच्चा प्लान करने से पहले डॉक्टर से मिलकर चर्चा करें। वे जितनी जल्दी डॉक्टर के पास पहुंचेंगे उनके बच्चे के एचआईवी से बचने में उम्मीद उतनी ज्यादा रहेगी। जिन एचआईवी पॉजीटिव महिलाओं की अस्पताल में डिलीवरी हुई है वे बच्चों के साथ डॉक्टरों से मिलने आती हैं तो खुशी होती हैं। ऐसी महिलाओं की गोद में जब स्वस्थ्य बच्चे नजर आते हैं तो दिल को तसल्ली मिलती है कि अभियान सफल हो रहा है।

 

जिले में कम हुए एड्स के मरीज

 

जागरुकता के चलते जिले में एचआईवी पॉजीटिव मरीजों की संख्या में कमी आ रही है। जिला नोडल अधिकारी एड्स डॉ. विजय छजलानी ने बताया कि मरीजों की जांच की संख्या तो लगातार बढ़ रही है लेकिन पॉजीटिव मिलने वाले मरीजों की संख्या में कमी आ रही है।

 

यह अच्छी बात है। 2011 में 33421 मरीजों की जांच में 932 मरीज एचआईवी पॉजीटिव मिले थे। इस वर्ष अब तक 84640 मरीजों की जांच हुई। इनमें से 539 एचआईवी पॉजीटिव मिले हैं। डॉ. छजलानी ने बताया कि जिले के शासकीय और अशासकीय अस्पतालों में बनाए गए 54 केंद्रों पर एचआईवी की निशुल्क जांच उपलब्ध है।