इंदौर। अगर आप अपने बच्चे को छोटी-छोटी बीमारियों में एंटीबायोटिक्स देते हैं, तो सावधान हो जाइये। यह आपके बच्चे में कई तरह की बीमारियां कर सकता है, जिनमें से एक सबसे खतरनाक बीमारी है टाइप 1 डायबिटीज।

 

अमेरिका की न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी में हाल ही में हुए अध्ययन में पता चला है कि बच्चों में एंटीबॉयोटिक के अधिक इस्तेमाल से डायबिटीज की आशंका बढ़ जाती है। क्योंकि ये एंटीबायोटिक्स शरीर के गट माइक्रोबॉयोम्स में बदलाव कर देता है। पिछले एक दशक में बच्चों को दी जाने वाली माइक्रोब-किलिंग एंटीबायोटिक्स का उपयोग बढ़ा है इसीलिए बच्चों में ऑटोइम्यून डिसीज जैसे डायबिटीज भी तेजी से बढ़ रही है।

इस बारे में शहर के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. निखिल ओझा कहते हैं एंटीबायोटिक्स लंबे समय तक लेने से शरीर के शुगर मेटाबॉलिज्म पर प्रभाव पड़ता है, जो इंसुलिन की मात्रा को प्रभावित कर सकता है। इसके साथ ही दूसरे कांप्लीकेशंस भी हो सकते हैं। इसलिए एंटीबायोटिक्स का उपयोग कम से कम करना चाहिए अन्यथा शरीर की स्वयं की लड़ने की क्षमता खत्म हो जाएगी और हर छोटी बीमारी से बचाव के लिए दवाओं पर ही निर्भर रहना पड़ेगा।

 

शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. संग्राम सिंह कहते हैं एंटीबायोटिक का उपयोग जरूरत होने पर ही करें। सर्दी, खंासी और वायरल में एंटीबायोटिक्स के उपयोग से बचना चाहिए या बहुत जरूरत हो तभी करें। बहुत कम लोग जानते हैं कि एंटीबायोटिक्स सिर्फ बैक्टीरियल इंफेक्शन में काम करती है वायरल इंफेक्शन में नहीं।

 

सिर्फ डॉक्टरी सलाह से ही लें एंटीबायोटिक

 

डायबिटीज विशेषज्ञ डॉ. संदीप जुल्का कहते हैं अभी तक इस बारे में कोई पुख्ता रिपोर्ट नहीं आई है कि एंटीबायोटिक्स से बच्चों में डायबिटीज होने की आशंका है, लेकिन फिर भी एंटीबायोटिक्स को सिर्फ सही समय और सही मात्रा में ही लेना चाहिए। खासकर बच्चों को डॉक्टर के बताए बिना एंटीबायोटिक देने से बचना चाहिए।