1997 में जब अंग्रेजी फ़िल्मों को देखने वालों की संख्या ज्यादा नहीं थी और इन फ़िल्मों की कहानी से ज्यादा दर्शकों को उनके जबर्दस्त ग्राफिक और कुछ बढ़िया 'सीन' लुभाते थे, ऐसे समय में निर्देशक जेम्स कैमरुन की फ़िल्म को देखने के लिए सिनेमाघर के बाहर लोगों का तांता लगा हुआ था.

मेरी समझ से ऐसा होने के दो कारण थे. पहला कि उस समय 70 एम एम के पर्दे पर एक विशालकाय जहाज 'टाइटैनिक' को डूबता देखना अपने आप में एक अद्भुत अनुभव था और दूसरा इस फ़िल्म की हीरोईन केट विंस्लेट, जो ज़ीरो फ़िगर कतई नहीं थी और भारतीय सुंदरता के मानकों के हिसाब से एकदम आदर्श 'सुंदरी' थी.

दरअसल फ़िल्म का लीड जैक, जिसे लियोनार्डो डि कैप्रियो निभा रहे थे, एक स्केच आर्टिस्ट था और महिलाओं के नग्न स्केच बनाने में उसे महारत हासिल थी. जैक एक दृश्य में रोज़ यानि केट विंस्लेट का एक वैसा ही चित्र बनाता है और सेकेंड के सौवें हिस्से के लिए केट बिना कपड़ों के नज़र आती है. 70 एम एम के पर्दे पर रोज़ के उस लुभावने स्वरुप को देखने के लिए भी सिनेमाघरों के बाहर लाइन लग रही थी.

हालांकि दूसरी थ्योरी का कोई पुख्ता सबूत नहीं है, सो हम मान लेते हैं कि 'टाइटैनिक' नाम के इस सिनेमाई करिश्मे को सलाम करने ही सिने प्रेमियों की भारी भीड़ इस चलचित्र के मोहपाश में बंधी चली आ रही थी.

टाइटैनिक डूब गया, जैक भी डूब गया, उस साल के ऑस्कर अवार्ड्स में फिल्म को 11 ऑस्कर मिले और बाकी सभी फ़िल्मों के अरमान भी डूब गए लेकिन उभर कर आईं केट विंस्लेट.

भारत में उनसे पहले जूलिया रॉबर्ट्स और सांड्रा बुलॉक और कुछ सुधि हॉलीवुड फ़ैन्स के लिए मोनिका बेलुची ही एकमात्र हॉलीवुड की पोस्टर गर्ल थीं लेकिन केट ने अपनी एंट्री ली और लाल बालों वाली इस लड़की को मन ही मन लोगों ने अपनी प्रेमिका मान लिया. वैसे उनके 'बाल' प्रेमियों को बता दें कि एक रोचक बात ये भी है कि अक्सर लाल बालों में नज़र आने वाली केट के बाल लाल थे नहीं.

पुरानी अदाकारा
टाईटैनिक को केट की पहली फ़िल्म मानने वाले भी कई लोग आपको मिल जाएंगे लेकिन ऐसा नहीं है, वो 11 साल की उम्र से ही थिएटर की शिक्षा दीक्षा में लग गई थीं और टाइटैनिक से पहले 1994 में वो अपनी पहली फ़िल्म 'हेवनली क्रिएचर्स' के लिए काफ़ी सारी तारीफ़े और अवॉर्ड बटोर चुकी थीं.

केट के नाम और काम का इतना हल्ला हुआ कि 1995 में उन्हें एमा थॉम्पसन और ह्यू ग्रांट के साथ बतौर सेकेंड लीड काम करने का मौका मिला. 'सेंस एंड सेंसिबिलिटी' नाम की इस फ़िल्म में केट का काम लोगों को इतना पसंद आया कि न सिर्फ़ उन्हें गोल्डन ग्लोब का नॉमिनेशन मिला, उन्हें ऑस्कर का अपना पहला नॉमिनेशन भी हासिल हुआ.



लेकिन इसका मतलब ये बिल्कुल नहीं है कि हमारी प्यारी केट को आसानी से टाइटैनिक का रोल मिल गया. निर्देशक जेम्स कैमरुन अपने आमिर ख़ान जैसे ही परफ़ेक्शिन्सिट हैं और केट को उन्हें बार बार चिट्ठी लिखकर, फोन कर मनाना पड़ा था कि भईया हम को रख लो, हम बढ़िया कर देंगे, ये सही हो जाएगा.

1995 से 1996 तक केट को इंतजार करवाने के बाद एक दिन जेम्स भईया का दिल पसीज गया और उन्होनें अपनी 'रोज़' का रोल केट विंस्लेट के नाम कर दिया और यहां से शुरु हुई कमाल की फ़िल्मों की वो यात्रा जो आज केट विंस्लेट को टॉप अभिनेत्री बना देती है.

बोल्ड सीन
ये सही है कि टाइटैनिक को लोग केट के न्यूड सीन के लिए याद करते हैं और पॉर्न वेबसाईट्स पर उनके उस दृश्य की क्लिपिंग मौजूद है, लेकिन केट ने इस न्यूडिटी को कभी वल्गर नहीं होने दिया.

वो 'द रीडर' और 'रिवोल्यूशनरी रोड' में भी न्यूड नज़र आईं लेकिन वो कहीं भी वल्गर नहीं हुआ और ना ही उनका नाम 'बी' ग्रेड अदाकाराओं की लिस्ट में डाला गया.



हालांकि 'रिवोल्यूशनरी रोड' के उस दृश्य में केट को बहुत परेशानी का सामना करना पड़ा था, इसका कारण था कि फ़िल्म के निर्देशक उनके दूसरे पति सैम मेंडेस थे और उनके सबसे अच्छे दोस्त लियोनार्डो के साथ इस दृश्य को अपने पति के साथ फ़िल्माना केट के लिए एक टॉर्चर था.

लोग उस दृश्य की तारीफ़ करते हैं, मैं जानती हूं कि कई लोग सिर्फ़ उसी दृश्य के लिए फ़िल्म देखते हैं. लेकिन मैं उसे फ़िल्माने में टूट चुकी थी. मेरे पति को उस दौरान सामने देखना एक मानसिक आघात था जिसे आप लोग नहीं समझ पाएंगे. - केट (जीक्यू मैग़ज़ीन से हुई बातचीत में)


अजीब पसंद
केट अलग मिजाज़ की महिला हैं और शायद कुछ अलग पसंद रखती हैं, जो शायद उनके चुनावों में नज़र आता है. फ़िल्म टाइटैनिक में रोल लेने के लिए उन्होनें जेम्स कैमरुन को परेशान कर दिया था लेकिन इस फ़िल्म के प्रीमियर पर वो नहीं आई क्योंकि उनके पूर्व प्रेमी की 'प्रार्थना सभा' में वो मौजूद थीं. उनके नज़दीकियों का मानना है कि वो हमेशा अपने परिवार और रिश्तों को काम पर प्राथमिकता देती हैं.

सुपरहिट और मेगा ब्लॉकबस्टर 'लॉर्ड ऑफ़ दि रिंग्स' में उन्हें रोल ऑफ़र हुआ था लेकिन उन्होनें इसे ठुकरा दिया क्योंकि वो इसे करने के मूड में नहीं थी, वैराईटी मैग़ज़ीन के हिसाब से वो उन दिनों छुट्टियों पर थी और उस समय छुट्टी उनकी पहली पसंद थी, बाद में इस किरदार को मिरांडा औट्टो ने निभाया था.

उन्होनें टाइटैनिक के बाद कई बड़े बजट की फ़िल्मों को ठुकराया जिनमें 'शेक्सपियर इन लव', 'एना एंड द किंग' और 'लॉर्ड ऑफ द रिंग्स' शामिल हैं, ऐसा करने का कारण वो अपनेआप को धरातल से जोड़े रखना बताती हैं.

मैं नहीं चाहती थी की लोगों को लगे कि टाइटैनिक के बाद मैंने अपने भाव और दाम बढ़ा दिए हैं. ये तो सभी करते थे और फिर बुरे दौर में नीचे भी आते थे. मैं ऐसा नहीं चाहती थी, मेरे अनुसार आप इस तरह अपने अंदर के कलाकार को मार देते हैं. - केट (न्यूयॉर्कर को दिए इंटरव्यू में)


उन्होनें टाइटैनिक के बाद 'हिडियस किंकी' नाम की एक छोटे बजट की फ़िल्म को चुना जिसे ठीक से रिलीज़ भी नहीं मिल सका लेकिन इस फ़िल्म ने उन्हें ढेर सारी क्रिटिकल तारीफ़ दी और केट, डायरेक्टर्स च्वाइस हो गईं.



तीन शादियां
वैसे तो भारत में उनके की दीवाने थे लेकिन केट का दिल कभी किसी भारतीय पर नहीं आया. ऐसा माना जाता है कि वो एक बार योगा सीखने के लिए जयपुर आई थीं लेकिन इसकी कोई पुख्ता तस्वीर हमें मिली नहीं.

भारत से दूसरा नज़दीकी रिश्ता, आप मान सकते हैं, वो उनकी फ़िल्म होली स्मोक में नज़र आता है जहां वो एक साध्वी के रुप में नज़र आई थीं लेकिन इसके अलावा वो भारत से दूर ही रही हैं और यहां के लोग उनको टाइटैनिक की रोज़ के रुप में ही जानते हैं.

लेकिन वो रोज़ 20 साल पहले थी, आज की रोज़ की बात करें तो वो 3 शादियां कर चुकी हैं और 3 ही बच्चों की मां हैं और उनके वर्तमान पति नेड रॉकएनरोल, अरबपति रिचर्ड ब्रेनसन के भतीजे हैं.

बॉडी शेमिंग
केट अपने करियर में बॉडी शेमिंग को लेकर काफ़ी संवेदनशील रही हैं और अपने भारी शरीर को लेकर उन्होनें कभी भी कोई हिचक महसूस नहीं की. वो अक्सर अपने फ़ैन्स को कहती रहती हैं कि हॉलीवुड बॉडीज़ पाने के लिए अपने शरीर के साथ खिलवाड़ न करें.
 


साल 2003 के इस कवर फ़ोटो में मैगज़ीन ने केट को फोटोशॉप की मदद से पतला दिखाया था.



जी क्यू मैगज़ीन ने जब अपने कवर पेज पर उनकी तस्वीर छापी और उसमें उन्हें पतला कर दिया तो इस बात पर उन्होनें जी क्यू पर केस कर दिया और मैगज़ीन को उनसे माफ़ी मांगनी पड़ी.

केट ने इस केस को जीतने के बाद कहा,"इस माफ़ी को सार्वजनिक तौर पर छपवाने का कारण ये है कि मैं नहीं चाहती लोगों को लगे मैं झूठ कहती हूं और अपने शरीर को मोटा या पतला करने के लिए उन्हीं तरीकों का इस्तेमाल करती हूं जो दुनिया करती है."

मैं इस पूरे वज़न के धंधे के खिलाफ़ हूं और लोगों को उनके शरीर के साथ खिलवाड़ नहीं करने देना चाहती, मैं भारी थी तो भी ठीक थी और हल्की हो गई हूं तो भी नैचुरल तरीके से क्योंकि ये मेरा शरीर है.


ऑस्कर
केट के पास 6 ऑस्कर नॉमिनेशन हैं लेकिन उन्हें साल 2009 में उनका पहला और एकमात्र ऑस्कर मिला था फ़िल्म द रीडर के लिए, जो एक नाज़ी अनुभव से गुज़री महिला की संवेदनशील कहानी है.

अजीब बात ये है कि साल 2009 में जीते इस ऑस्कर को केट ने अपने बाथरुम में रखा है क्योंकि वो अपने घर आने वाले हर आदमी को इसे उठाने नहीं देना चाहती थीं.

"जो भी मेरे घर आता वो इसे उठा लेता और इसके साथ फ़ोटो खिंचवाता, ये मेरी सबसे अजीज़ चीज़ है इसलिए मेरे सबसे पर्सनल कोने में है" केट (वैरायटी को दिए इंटरव्यू में)


लेकिन एक बात जो आज भी उनके साथ जुड़ी है, वो है टाइटैनिक, वो ऑस्कर जीत चुकी हैं, टाइटैनिक को 20 साल पीछे छोड़ चुकी हैं लेकिन आज भी उन्हें फ़िल्म स्क्रीन पर देखकर मन में वॉयलिन की वही धुन बजती है और सिलीन डियोन का वो गाना याद आ जाता है - माई हार्ट विल गो ऑन...वो लाल बालों वाली लड़की भूलती नहीं जो आज 42 साल की हो गई है.